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Monday, April 9, 2012

लागत घटाने के 18 तरीके :


जब महंगाई की दर 12 फीसदी के करीब जा पहुंची है, तब आप लागत कैसे कम करेंगे? एक समय का भोजन करना तो योगियों का काम है, लेकिन हम अच्छा जीवन स्तर बनाए रखने के बाद भी लागत कैसे घटाएं।  

1. घर पर भोजन करें
बाहर भोजन करना महंगा विकल्प है। अगर आप बाहर खाना खाते हैं तो घर के 50 रुपए के मुकाबले 200 रुपए खर्च करते हैं। यह 150 रुपए आप सिस्टैमेटिक इनवेस्टमेंट प्लान में लगाएं तो 30 साल में 30 करोड़ रुपए हो जाते हैं। 

फाइनेंशियल प्लानिंग: सुरक्षित भविष्य का पहला कदम


फाइनेंशियल प्लानिंग का जीवन में बड़ा महत्व होता है, जैसा कि अक्सर कहा जाता है कि कोई ठोस नीति तैयार किए बिना किसी भी काम को सफलतापूर्वक नहीं किया जा सकता है। उसी तरह जीवन के वित्तीय लक्ष्यों और जरूरतों की पूर्ति में फाइनेंशियल प्लानिंग की भूमिक सबसे अहम है।

Tuesday, October 18, 2011

फाइनैंशल प्लानर को बनाएं अपना राजदार :

मौजूदा दौर में ज्यादातर लोग फाइनैंशल प्लानिंग की अहमियत को पहचानते हैं।
लोग जानते हैं कि अगर उन्हें अपनी जिंदगी के तमाम मकसदों को पूरा करना है, तो उन्हें इसके लिए एक तय योजना के हिसाब से आगे बढ़ना होगा। इससे साफ होता है कि क्यों ज्यादातर लोग महीनों तक एक सही फाइनैंशल प्लानर या वित्तीय सलाहकार की खोज में रहते हैं ताकि उन्हें ऐसी योजना मिल सके जो उनके बच्चों की पढ़ाई, विदेश की छुट्टियां, रिटायरमेंट के बाद के लिए फंड और ऐसी ही अन्य जरूरतें आसानी से पूरी हो सकें। दुर्भाग्य से लोग बड़े स्तर पर फाइनैंशल प्लानिंग की प्रक्रिया में अपनी भूमिका को हल्के में लेते हैं। ये लोग नहीं समझते हैं कि उनके द्वारा मुहैया कराई गई सूचनाएं योजना को बना या बिगाड़ सकती हैं।

Sunday, October 9, 2011

सोने (Gold) की चमक कभी फ़ीकी नहीं पड़ती :

भारतीयों को सोने (स्वर्ण) की खरीदारी के लिए जाना जाता है। भारतीय किसी भी अन्य देश के लोगों से अधिक सोना खरीदते हैं।   अमरिका, फ्रांस और जर्मनी कि सरकारों के पास कुल जितना सोना है उससे ज़्यादा सोना भारतीयों के पास है!

ज़ाहिर है, हम भारतीय सोने को बेहद प्यार करते हैं! लेकिन क्या सोने का निवेश के लिए प्रयोग किया जाता है? नहीं। जैसे कि हमने देखा, भारत का अधिकांश सोना आभूषणों के रूप में है - भारत में सोने की कुल मांग का लगभग 73% आभूषण बनाने के लिए प्रयोग होता है।

Wednesday, September 21, 2011

कहीं महंगी न पड़ जाए मुफ्त की आर्र्थिक सलाह :

इस दुनिया में आपको हर बात के लिए मुफ्त में सलाह मिल जाती है। समस्या यह है कि ऐसे में फर्क करना मुश्किल होता है कि कौन सी सलाह आपके लिए बेकार की है और कौन सी वास्तव में महत्वपूर्ण है। डॉक्टर के मामले को ही लीजिए।

कई बार जब मामला समझ में नहीं आता है तो लोग दूसरे डॉक्टर से सलाह लेने में नहीं हिचकते हैं। जब फीस देकर डॉक्टर की सलाह लेने में कभी-कभार दूसरे डॉक्टर से सलाह लेने की जरूरत पड़ जाती है तो समझिए मुफ्त की सलाह में कितनी उलझनें होती होंगी।

Friday, April 15, 2011

आवधिक नीति (term policy) / आवधिक बीमा (term insurance) ..........एक सर्वोत्तम नीति

हम जानते हैं कि यूनिट लिंक्ड बीमा योजना (यूलिप) (Unit Linked Insurance Policy – ULIP) बंदोबस्ती योजना (endowment plan) से बेहतर साबित होती है।

लेकिन असली सवाल यह है – क्या एक यूनिट लिंक्ड बीमा योजना जीवन बीमा (life insurance) खरीदने का सबसे अच्छा तरीका है?
अब मैं आपको एक सीधा जवाब देता हुँ – नहीं, ऐसा नहीं है.
अब, आइए देखते हैं क्यों!
जीवन बीमा क्यूँ ख़रीदा जाता है? क्या जरूरत है जीवन बीमा की?

जवाब सीधा है – जीवन बीमा इसलिए खरीदा जाता है ताकि अगर हम नहीं रहें तब भी हमारे आश्रित (dependents) अपना सामान्य जीवन जारी रख सकें।

जब आप अपनी कार, या अपने घर के लिए बीमा खरीदते है, तब उस धन (बिमा किश्त) पर कोई वापसी की उम्मीद रखते हैं? क्या आप उम्मीद करते हैं कि यदि कार किसी दुर्घटना का सामना नहीं करे तो आपको साल के अंत में ब्याज सहित पैसा मिल जाए?

बिल्कुल नहीं! तो हम अपने जीवन बीमा से भुगतान वापस पाने की उम्मीद क्यों रखते हैं? और इसी चक्कर में बीमा के लिए ज़रूरत से अधिक प्रीमियम (premium) क्यों भरते हैं? क्या हमें “शुद्ध” बीमा (pure insurance cover) नहीं खरीदना चाहिए, जैसे हम अपनी कार या घर के लिए करते हैं?

हाँ, जीवन बिमा खरीदने का ठीक तरीका तो यही होगा। हमें समझना चाहिए कि बीमा (insurance) और निवेश (investment) अलग हैं, और उन्हें एक दुसरे से अलग ही रखना चाहिए।
निवेश के लिए आपको जरूरत है लक्ष्यों और रणनीतियों की पहचान की, और तदनुसार निवेश करने की।

कैसे खरीदें जीवन बिमा?

जीवन बीमा के लिए आपको उस राशि की गणना की आवश्यकता है जिस से उत्पन्न रिटर्न से आपके आश्रित आपके बाद भी वैसा ही जीवन स्तर बनाये रख पाएं जैसा की आप उन्हें आज दे रहे हैं। जब आप एक जीवन बीमा पॉलिसी खरीदते है तो यह राशि आपकी “बीमित राशि” (sum assured) होनी चाहिए। और यह आपको एक आवधिक नीति के द्वारा ही लेनी चाहिए।

आवधिक बीमा आपके जीवन के लिए केवल एक शुद्ध जोखिम कवर (pure risk cover) प्रदान करता है। यह बीमा का ऐसा प्रकार है जहाँ आपकी प्रीमियम राशि का इस्तेमाल सिर्फ बीमा खरीदने के लिए किया जाता है – ठीक वैसे ही जैसे कार या घर का बीमा खरीदने के लिए किया जाता है।

आवधिक बीमा (term insurance / टर्म इंश्योरेंस या प्लान) के लाभ

चुँकि आवधिक बीमा पॉलिसी में प्रीमियम राशि का इस्तेमाल केवल बीमा खरीदने के लिए किया जाता है, आवधिक बीमा का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह आपको सबसे कम कीमत पर जीवन बीमा प्रदान करता है। इसका मतलब यह है कि प्रीमियम में बचे पैसे अन्य लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अन्य विकल्पों में (जैसे की म्यूचुअल फंड्स में) निवेश किये जा सकते है – पर्याप्त बीमा का पूरा लाभ उठाने के साथ साथ!

आवधिक बीमा (term insurance / टर्म इंश्योरेंस या प्लान) के दोष

आवधिक बीमा योजना का कथित दोष यह है कि अगर हम कार्यकाल या अवधि (tenure or tenor) के अंत तक जीवित रहते हैं तो कार्यकाल के अंत में कोई पैसा वापस नहीं मिलता है। जैसे कि हमने पहले देखा, कार के बीमा की तरह आपको कुछ भी वापस नहीं मिलता है।

लेकिन अगर आप कार्यकाल के अंत में पैसा वापस नहीं मिलने की वजह से परेशान हो रहे हों, तो आवधिक बिमा योजना का एक अलग संस्करण भी उपलब्ध है – और यह कहलाता है “आवधिक बीमा योजना – प्रीमियम की वापसी” (Term Insurance with Return of Premium – ROP)। यहाँ पर यदि आप बीमा अवधि के अंत तक जीवित रहते हैं, तो आपको आपके द्वारा भुगतान की गयी सारी प्रीमियम राशि वापस मिल जाती है। और अलग से लाभ यह है कि यह राशि कर मुक्त है! लेकिन कृपया ध्यान दें कि आवधिक बीमा की “प्रीमियम की वापसी” के साथ वाली बीमा योजना में प्रीमियम राशि नियमित अवधि बीमा योजना के मुकाबले काफी अधिक होती है।

उदाहरण
अगर एक 30 वर्षीय पुरुष के लिए 25 साल की अवधि के लिए कुल बीमित राशि 10 लाख रुपए है, तो सांकेतिक बाजार दर निम्नलिखित हैं:

* बंदोबस्ती योजना: प्रति वर्ष 38,109 रुपए
* प्रीमियम की वापसी के साथ आवधिक योजना: प्रति वर्ष 8,836 रुपए
* आवधिक योजना: प्रति वर्ष 2,964 रुपए

जैसा कि आप देख सकते हैं, यहाँ प्रीमियम में बहुत बड़ा अंतर है। और जैसे की हम पहले चर्चा कर चुके हैं, प्रीमियम में बचा पैसा आप अन्य विकल्पों में बेहतर निवेश कर सकते हैं।
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Source : paisaplanner

Thursday, April 14, 2011

सेवानिवृत्ति के बाद के जीवन को बनाएं आसान

मेरी उम्र 59 साल है और मैं 62 साल की उम्र में सेवानिवृत्त हो जाऊंगा। मेरी सालाना आय 40 लाख रुपये है और मेरे कार्यालय ने मुझे रहने, कार, चालक, फोन और बिजली की सुविधाएं दी हैं। मेरा महीने में यात्रा पर 12 लाख रुपये, स्वास्थ्य बीमा पर 39,000 रुपये, आयकर भुगतान पर 12 लाख रुपये और विविध खर्चों पर 3 लाख रुपये का खर्च होता है। मेरा कोई प्रोविडेंट फंड नहीं है लेकिन मैं हरेक साल 70,000 रुपये पीपीएफ में जमा करता हूं। वित्तीय रूप से मेरी पत्नी मुझ पर निर्भर है। मेरे पास दो अपार्टमेंट हैं जिन्हें मैंने किराये पर लगा दिया है और इससे प्रति महीने 38,000 रुपये की प्राप्ति होती है।

सेवानिवृत्ति  के बाद मैं 15 लाख रुपये मूल्य की कार खरीदना चाहता हूं और इसके रख-रखाव, चालक और बिजली पर मुझे भुगतान करना होगा। इस पर सालाना करीब 6 लाख रुपये का खर्चा आएगा। क्या आप मुझे मेरे पोर्टफोलियो में बदलाव और अधिक से अधिक प्रतिफ ल प्राप्त करने के लिए सलाह दे सकते हैं, ताकि सेवानिवृति के बाद मुझे कोई दिक्कत नहीं हो।
-MR. A

कुछ लोग आराम से सेवानिवृत्त होना चाहते हैं लेकिन यह नहीं जानते कि इसके लिए क्या चीजें जरूरी हो सकती हैं। कुछ ही लोग सेवानिवृत्ति के बाद बेहतर जीवन जीने के लिए आवश्यक प्रयास करते हैं और आप उनमें से एक हैं।

जैसे ही लोग सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचते हैं, उनके मन में इस तरह की चिंताएं होनी आम बात है। आपके साथ भी ऐसा ही हो रहा है। आपने सेवानिवृत्ति के लिए आवश्यकता से अधिक बचत कर ली है जो पर्याप्त है। आपने स्वास्थ्य बीमा भी ले रखा है जो  जीवन में किसी भी स्वास्थ्य संबंधी कठिनाई से आपको सुरक्षा प्रदान करेगा। आपकी पत्नी को छोड़कर आर्थिक रूप से आप पर कोई निर्भर भी नहीं है।

अवसर की चूक

अब आप पोर्टफोलियो से प्राप्त होने वाले प्रतिफल को बढ़ाने चाहते हैं जबकि अगर आप थोड़ा बहुत प्रयास करते तो इसे आसानी से हासिल किया जा सकता था। मिसाल के तौर पर पीपीएफ में सालाना 70,000 रुपये का निवेश और बाकी का एचडीएफसी टैक्ससेवर में 30,000 रुपये निवेश करने की रणनीति इसका उदाहरण है। आपने यह निवेश दूसरे तरीके से किया होता तो अधिक लाभ अर्जित किया होता। लंबी अवधि में ईएलएसएस से प्राप्त प्रतिफल काफी अधिक होता है जो पीपीएफ पर मिलने वाले 8 फीसदी के ब्याज से कहीं अधिक है। इसी तरह, आपका बैक बैलेंस अनावश्यक करों को आमंत्रित कर रहा है।

इन रु पयों को लिक्विड फंडों में निवेश करना आपके लिए अधिक फायदेमंद होता, क्योंकि कर बचत में यह काफी मददगार होता है। आपको बेहतर प्रतिफल और बड़े कोष के निर्माण के लिए ऋण साधनों में किए गए निवेश को इक्विटी में डालना चाहिए।

सेवानिवृत्ति के पश्चात
सेवानिवृत्ति के बाद आपकी आय में कमी आएगी जिससे आप पर करों का बोझ भी कम हो जाएगा। हालांकि, इसके बाद आपके रहने पर अधिक खर्च होगा क्योंकि लगभग सभी मद में भुगतान आपको अपने बचत में से ही करना होगा। सेवानिवृत्ति कोष को बढ़ाने के लिए आपको अनावश्यक खर्चों में कटौती करनी होगी।

सेवानिवृत्ति के बाद का जोखिम

बाजार की हाल की अनिश्चितता ने यह बात पूरी तरह साबित कर दी है कि कैसे बेहतर योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। आपके पोर्टफोलियो में बाजार में आने वाली अनिश्चितताओं का सामना करने की ताकत होनी चाहिए। नीचे उन चार जोखिमों की चर्चा की गई है जिनका सेवानिवृत्ति के बाद आपका सामना कर सकते हैं-
चिकित्सा क्षेत्र में बेहतरी के साथ ही जीवन प्रत्याशा पहले की अपेक्षा बढ़ी है। लेकिन अगर आपके पास आय का नियमित स्रोत नहीं है तो फिर आपको कुछ मुश्किलें हो सकती हैं। यह बात पूरी सुनिश्चित करें कि सेवानिवृत्ति के बाद आपका पोर्टफोलियो आय अर्जित करने में सक्षम है।

स्वास्थ्य पर बढऩे वाला खर्चा
स्वास्थ्य पर होने वाला खर्च सभी के लिए चिंता का विषय होता है। इससे निपटने के लिए आपको पर्याप्त बीमा सुरक्षालेनी चाहिए।

भावना में बह कर न लें निर्णय

निवेशक भी साधारण मानव ही होते हैं। व्यावहारिक वित्तीय शोधों में पाया गया है कि अनिश्चितता के समय कई लोगा दिमाग की वजह भावना में बहकर कदम उठाते हैं और ऐसे में पूरी तरह से अपने हितों की रक्षा मुश्किल हो जाती है। भावना में बहकर किए गए फैसलों से आपकी पूरी योजना चौपट हो सकती है।

परिसंपत्तियों का बीमा

अपनी परिसंपत्ति की सुरक्षा के लिए भी पर्याप्त कदम उठाना आवश्यक होता है। यह बात पूरी तरह सुनिश्चित करें कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आपने पर्याप्त बीमा ले रखा है।
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Source : BS

इस साल बड़ी बचत करने का संकल्प लें

मैं एक आशंका प्रकट करता हूं। नए साल के आपके संकल्पों की सूची में शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ चीजें, मसलन वजन घटाना और अन्य बातें,  शामिल हो सकती हैं, लेकिन हो सकता है कि आपने वित्तीय सेहत के लिए कोई संकल्प न लिया हो। चिंता मत कीजिए। मैं यहां वित्तीय विवेक की अच्छाई-बुराई की बात नहीं कर रहा हूं, बस कुछ आसान टिप्स बता रहा हूं जिनको अपना कर वर्ष 2011 में पिछले साल की तुलना में आप थोड़ा अमीर हो सकते हैं। इनमें खर्च करना, बीमा, निवेश और अक्लमंदी से उधार लेना शामिल हैं। ऐसा कहा जाता है कि सबसे लंबा सफर एक कदम से शुरू होता है। तो लीजिए, यहां हम आपको कुछ कदम बता रहे हैं जिनको आप उठाना चाहेंगे।

खर्च पर लगाम
अपने क्रेडिट कार्ड की परवाह करिये, यह भी आपकी परवाह करेगा। हमारे बुजुर्गों ने हमें क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल न करने की सलाह दी है। मैं सिर्फ यह कह रहा हूं कि इसका स्मार्ट तरीके से इस्तेमाल करिये। पहला, अपने कार्ड इस्तेमाल को अपनी रोज की खरीद के साथ जोडिय़े। यह खरीद चाहे पेट्रोल पंप पर हो या सुपरमार्केट या अन्य स्थानों पर। इसे बड़ी खरीदारी के लिए मत रखिए। हर खरीद पर आपको रिवार्ड अंक मिलते हैं। आमतौर पर 100 रुपये खर्च करने पर एंक अंक। इन अंकों को तय समय में किसी उपयोगी या खूबसूरत चीज के लिए भुनाया जा सकता है। कुछ बैंकों में समय की सीमा है जिसमें अंक भुनाने होते हैं। यह सुनिश्चित कीजिए कि आपके अंक लैप्स न हो जाएं।

सिर्फ 'सिग्नेचर कार्डÓ या 'प्लेटिनम प्लस कार्डÓ की खूबसूरती देख कर इन्हें इक_ïा किए जाने से परहेज करें। इन कार्डों के इस्तेमाल पर आपको भारी सालाना शुल्क भी चुकाना पड़ सकता है। बैंकों के साथ कार्ड को 'फ्री फॉर लाइफÓ के तौर पर मुहैया कराए जाने के लिए मोलभाव करें।  अगर ऐसा संभव नहीं है तो यह सुनिश्चित करने की कोशिश जरूर करें कि  मौजूदा कार्ड को आप एकमुश्त शुल्क चुका कर फ्री कार्ड बना सकते हैं।

बैंक अक्सर यह प्रचार करते हैं कि आप 50 दिन की क्रेडिट अवधि का लाभ उठा सकते हैं। इसे लेकर सावधान रहें, यह अवधि आपके बिलिंंग साइकल की शुरुआत से 50 दिन होती है।  यह भी याद रखें कि आपके द्वारा कार्ड बिल की आंशिक अदायगी के बाद भी फ्री ऋण की अवधि बनी रहती है। उदाहरण के लिए, अगर आपका मौजूदा बिल 1000 रुपये का है और आपने सिर्फ 100 रुपये का भुगतान कर दिया है और बाकी बचा हुआ है तो आपके द्वारा किए जाने वाले खर्च पर तुरंत मोटा ब्याज लगना शुरू हो जाएगा। इसलिए अपने पूरे बिल को एक बार में चुकाने की कोशिश करें। आवर्ती ऋण बोझ कम किए जाने का अच्छा तरीका है। इसके अलावा 'जीरो ईएमआईÓ योजनाओं के झांसे में कभी नहीं आएं, क्योंकि इनमें प्रोसेसिंग चार्ज को कुछ नहीं होता है, लेकिन ब्याज छिपा रहता है।

अगर आप ऑनलाइन खरीदारी को पसंद करते हैं तो फैशनऐंडयू डॉट कॉम या ब्रांडमाइल डॉट कॉम जैसी 'एग्रीगेटर डिस्काउंट साइटोंÓ पर साइन ऑन करेंं। ये साइटें कई चर्चित एवं नए ब्रांडों पर भारी डिस्काउंट की पेशकश करती हैं और इससे आपको एक बड़ी बचत करने में मदद मिल सकती है।

बीमा सुविधा
बीमा पॉलिसी को ऑनलाइन खरीदें और एजेंट के जरिये खरीदारी की तुलना में प्रीमियम पर 30 फीसदी से भी अधिक के डिस्काउंट का लाभ उठाएं। अगर आप अविवाहित हैं और आप पर आश्रित नहीं है तो जीवन बीमा नहीं खरीदें। लेकिन दुर्घटना, स्वास्थ्य और संपत्ति बीमा की खरीदारी से पीछे न रहें।

अगर आपने होम लोन लिया है तो अपने परिवार की सुरक्षा के लिए टर्म कवर लें। बैलेंस मॉर्गेज रिडम्पशन कवर घटाए जाने के लिए यह अच्छा विकल्प हो सकता है। कोई भी फैसला लेने से पहले ठीक से गणना करें।
स्वास्थ्य बीमा खरीदते समय कम प्रीमियम वाली योजना को प्राथमिकता दिए जाने की तुलना में परिचितों से परामर्श लें। बीमा खरीदने के लिए ऐसी कंपनी का चयन करें तो आपसी तौर पर दावों का निपटान करती हो और थर्ड-पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (टीपीए) पर निर्भर नहीं हो।

उचित दरें और अन्य शर्तों के बारे में जानकारी के लिए बीमा की तुलना करने वाली वेबसाइटों को खंगालें। वैसे यह आप पर निर्भर करता है कि आप अधिक भुगतान रकम का चयन कर सकते हैं। इससे आपको प्रीमियम कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि इस तरह का फैसला लेते वक्त बहुत ज्यादा आशावादी रुख न अपनाएं।

निवेश योजना
अगर आप नया ब्रोकिंग अकाउंट खोल रहे हैं तो सबसे पहले ऑनलाइन विकल्प पर ध्यान दें, क्योंकि ऑफलाइन विकल्प की तुलना में इसके लिए ब्रोकरेज शुल्क कम है। इसके अलावा अगर आप घर से कारोबार करते हैं तो असीमित इस्तेमाल वाले इंटरनेट प्लान को चुनें, क्योंकि यह दीर्घावधि में आपके लिए अधिक किफायती साबित होगा। आमतौर पर इमरजेंसी उद्देश्यों के लिए बैंक के बचत खातों में बहुत ज्यादा धन न रखें, क्योंकि आपको इस पर अधिक बचत नहीं होती है। लेकिन आपको अपने खाते में औसतन त्रैमासिक बैलेंस को बनाए रखना जरूरी है। इससे आपको बड़े नॉन-मेंटेनेंस शुल्क से बचने में मदद मिलेगी।

लेनदेन ऑनलाइन या बैंक के एटीएम के जरिये करने की हरसंभव कोशिश करें। बैंक ऐसी कई सेवाओं की पेशकश शाखा में किए जाने वाले लेन-देन की तुलना में मुफ्त में या फिर बड़े डिस्काउंट के साथ करते हैं। ऑनलाइन स्टेटमेंट्ïस का चयन आपको डेबिट कार्ड पर कुछ रिवार्ड प्वाइंट का भी हकदार बना सकता है।
दूसरे घर की खरीदारी के दौरान संभव हो सके तो किराएदार के साथ स्पष्टï रूप से करार करें। यह आपको अपने ईएमआई की जरूरत पूरा करने में सक्षम बनाएगा। कर बचाने के लिए इक्विटी-लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ईएलएसएस) में जरूरत से ज्यादा निवेश कभी न करें। बाजार में कई डायवर्सिफाइड फंड मौजूद हैं जो तीन साल की लॉक-इन अवधि के बगैर अच्छा रिटर्न देते हैं। इंडेक्स फंड या एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) जैसे सस्ते उत्पादों का चयन करें। सालाना एक फीसदी की भी बचत लंबे समय में आपकी वित्तीय सेहत में बड़ा इजाफा कर सकती है।

कर्ज लेने से बचें
घर या कार खरीदते समय डाउन पेमेंट यानी तत्काल अदायगी की हरसंभव कोशिश करें। इससे न सिर्फ आपके द्वारा चुकाए जाने वाले ब्याज की बचत होगी बल्कि आपकी विश्वसनीयता को भी बढ़ावा मिलेगा और आपको अन्य प्रोत्साहन या छूट हासिल करने में भी मदद मिलेगी। त्रैमासिक या सालाना की तुलना में दैनिक या मासिक तौर पर घटने वाले बैलेंस वाली योजना के तहत साथ होम लोन लें। उचित दरों और अन्य जानकारी हासिल करने के लिए ऋण की तुलना करने वाली वेबसाइटों को खंगालें।

Monday, April 4, 2011

बेहतर रिटर्न के लिए आदर्श पोर्टफोलियो.........

आपने निवेश के लिए जो पोर्टफोलियो तैयार किया है वह अच्छा है या ठीक ठाक, इसका पता लगाना इतना आसान नहीं है। एक ही पोर्टफोलियो के बारे में अलग अलग लोगों की राय अलग अलग हो सकती है। या फिर यह भी हो सकता है कि जो पोर्टफोलियो आपके लिए फायदेमंद हो, वह दूसरे निवेशक के लिए न हो। किसी भी व्यक्ति के लिए सबसे अच्छा पोर्टफोलियो कौन सा है यह पता लगाने के लिए उस व्यक्ति की जोखिम उठाने की क्षमता, नकदी की उसकी जरूरतें, लक्ष्य और निवेश से उसे कर में कितनी छूट चाहिए, इन सब बातों पर विचार करना जरूरी होगा।

चलिए हम 25 वर्षीय अश्विनी मुगड का उदाहरण ही ले लेते हैं जो सॉफ्टवेयर क्षेत्र से जुड़ी हैं। उन्होंने कहीं पढ़ा कि युवावस्था में इक्विटी में निवेश करना बेहतर रहता है क्योंकि तब निवेशक ज्यादा जोखिम उठाने की स्थिति में रहता है। छह महीने पहले ही उन्होंने शेयरों में निवेश करना शुरू किया। मगर टेलीकॉम (2जी) विवाद सुर्खियों में आने के बाद ही उनका पोर्टफोलियो 30 फीसदी घट गया। इस नुकसान के बाद अश्विनी अब शेयर बाजार से दूर रहना चाहती हैं। उनके पिता ने उन्हें सुझाव दिया कि वह शेयर बाजार से अपने पैसे को निकाल कर उसे जमा खातों में डाल दें जहां उन्हें 8.5 फीसदी से अधिक का ब्याज मिलेगा। अश्विनी कहती हैं, 'पोर्टफोलियो बनाने की दिशा में यह मेरा पहला कदम था। मुझे एहसास हुआ कि कम उम्र की होने के बाद भी मेरे लिए निवेश के परंपरागत तरीके ही बेहतर हैं।

दरअसल अश्विनी ने जब निवेश करना शुरू किया तो उन्होंने कई गलतियां कीं। एक आदर्श पोर्टफोलियो वही होता है जिसमें कम से कम जोखिम और अधिक से अधिक प्रतिफल की संभावना हो। अच्छे पोर्टफोलियो के जरिए आपका उद्देश्य वित्तीय संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर एक तय अवधि तक वित्तीय लक्ष्य को हासिल करना हो।

संपत्ति का आवंटन: सबसे पहले यह फैसला लेना होगा कि आप किन क्षेत्रों में निवेश करना चाहते हैं। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आप कितना जोखिम उठा सकते हैं और आपके पास अपना वित्तीय लक्ष्य हासिल करने के लिए कितना समय है। दरअसल इस मामले में जोखिम उठाने की क्षमता का मतलब यह है कि बेहतर रिटर्न पाने के लिए क्या आप अपने निवेश का कुछ हिस्सा या पूरा हिस्सा जोखिम में डाल सकते हैं। उदाहरण के लिए अगर कोई निवेश की शुरुआत कर रहा है तो उसे बैलेंस्ड फंड या एक्सचेंज ट्रेडेड फंड में निवेश कर सकता है। जब निवेशक को इक्विटी या डेट से जुड़े जोखिम की समझ आने लगे तो वह फिर अपनी मर्जी और जरूरत के हिसाब से ऐसेट वर्ग में निवेश घटा या बढ़ा सकता है। संपत्ति का आवंटन तभी फायदेमंद होता है जब निवेशक एक संसाधन से होने वाले फायदे को दूसरे संसाधन के लिए इस्तेमाल करे ताकि संतुलन बना रहे।
निवेश का लक्ष्य: आप अपना पैसा कहां लगाएं यह इस बात पर भी निर्भर करेगा कि आपका लक्ष्य क्या है। अगर आप सेवानिवृत्ति के लिए पैसे बचा रहे हैं तो आप अपने निवेश का एक बड़ा हिस्सा इक्विटी में डाल सकते हैं। वहीं दूसरी ओर मान लीजिए कि आप पैसे इसलिए जमा कर रहे हैं ताकि 3 साल बाद आप एक कार खरीद सकें तो फिर आपको अपने निवेश का ज्यादातर हिस्सा डेट में डालना चाहिए।

वहीं ऐसे निवेश जो एक तय समय के लिए किए जा रहे हों जैसे कि बच्चों की पढ़ाई, उनकी शादी और इस तरह के दूसरे काम तो भी आपके लिए पैसे डेट में लगाना ही उचित होगा। लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए इक्विटी में निवेश किया जा सकता है- लक्ष्य जितना दूर रहेगा, इक्विटी में निवेश उतना अधिक किया जा सकता है। मगर जैसे ही आप अपने लक्ष्य के करीब आने लगें तो 3 साल पहले ही इक्विटी में लगे पैसे को निकालकर डेट में डाल लें। इस तरह आपको अच्छा प्रतिफल भी मिल सकेगा और आखिर समय में इक्विटी में उतार चढ़ाव के खतरे से आप अपने निवेश को बचाए भी रख सकेंगे।

कैसे बनाएं पोर्टफोलियो: आप अपने लिए निवेश के विकल्पों को खुद परखें। अगर आपकी उम्र कम है तो आप अपने पैसे को अलग-अलग हिस्सों में स्टॉक, म्युचुअल फंड, बॉन्ड, लोक भविष्य निधि (पीपीएफ) और बैंक के जमा खातों में डाल सकते हैं। आप अपने निवेश का ज्यादा हिस्सा स्टॉक या इक्विटी आधारित म्युचुअल फंडों में लगा सकते हैं। जब आप सीधे शेयरों में पैसा लगा रहे हों तो कुछ निवेश ऐसे शेयरों में भी करें जहां आपको लाभांश मिलेगा कयोंकि अगर बाजार में तेजी नहीं भी रहती है तो भी आपको लाभांश से मुनाफा हो सके।

कोशिश करें कि हमेशा निवेश के सस्ते विकल्पों को चुनें। मान लीजिए कि आप इक्विटी में निवेश करना चाहते हैं। अधिकांश ब्रोकर ऑफलाइन की तुलना में ऑनलाइन निवेश के लिए कम ब्रोकरेज वसूलते हैं। ठीक इसी तरह म्युचुअल फंडों के मामले में प्रवेश शुल्क भले ही न हो, पर अगर आप एक तय अवधि के पहले पैसे निकाल लेते हैं तो कुछ फंड हाउस कुछ योजनाओं के लिए निर्गम शुल्क वसूलते हैं। ऐसे में अपने निवेश पर लगातार नजर बनाए रखें। ऐसा करने पर आपको पता रहेगा कि आप अपने निवेश संबंधी जो फैसला ले रहे हैं वह सही है या आपको उसे और समझने की जरूरत है। निवेश करते वक्त आप कर बचत का भी ध्यान रखें। कुछ संसाधनों में निवेश से मिलने वाला प्रतिफल जैसे पीपीएफ, कर-मुक्त बॉन्ड और शेयरों/म्युचुअल फंडों से मिलने वाला लाभांश कर मुक्त होता है।


पोर्टफोलियो में बदलाव करें: आप जरूरत और समय के हिसाब से अपने निवेश पोर्टफोलियो में बदलाव कर सकते हैं। हालांकि थोड़े थोड़े समय में इसमें बदलाव करना चतुराई नहीं होगा क्योंकि इससे आप पर ट्रांजैक्शन शुल्क और कर का बोझ पड़ेगा, मगर आप साल में एक बार अपने पोर्टफोलियो में बदलाव पर विचार कर सकते हैं। एक निश्चित समय पर पोर्टफोलियो में बदलाव करने से बेहतर होगा कि आप अपने पोर्टफोलियो में तब बदलाव करें जब निवेश में संतुलन बनाने की जरूरत महसूस हो। आप अपने निवेश का कुछ हिस्सा निकालकर बेहतर प्रदर्शन करने वाले संसाधनों में भी लगा सकते हैं। एक बार पोर्टफोलियो बनाकर लंबे समय के लिए निश्चिंत हो जाने से बेहतर इस रवैये को अपनाना होगा।

कर का भी रखें ध्यान: निवेश से प्राप्त होने वाले प्रतिफल के लिए कर का भी ध्यान रखें। आपके पोर्टफोलियो में ऐसा निवेश जरूर होना चाहिए जिसका प्रतिफल कर से मुक्त हो। कई बार कर अदायगी में छूट की सीमा में इससे फायदा होता है। आपका प्रतिफल निचले दायरे में आ जाता है और आप अधिक कर बचा पाते हैं।
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स्रोत : बीएस

निवेश को प्रक्रिया मानकर अपनाएं एक योजनाबध्द तरीका.....

पर्याप्त पैसों का अभाव या फिर मन के अंदर बैठा हुआ इस बात का भय कि कहीं हमारे पैसे डूब न जाएं हम निवेश या बचत की शुरुआत ही नहीं करते।

निवेश की शुरुआत नहीं करने कीयही दो मुख्य वजहें हो सकती हैं। हम यह भी सोचते हैं कि निवेश एक बार किया जाने वाला काम है, जबकि वास्तविकता यह है कि निवेश एक प्रक्रिया है। निवेश के लिए आपके पास एकमुश्त बड़ी राशि का होना जरुरी नहीं है। निवेश की शुरुआत आप थोड़ी पूंजी से भी कर सकते हैं।निवेश के तमाम विकल्प बाजार में भरे पड़े हैं।

म्युचुअल फंड, शेयर, बैंकों की सावधि जमा योजनाएं, डाकघरों की विभिन्न योजनाएं, सोना, रियल एस्टेट आदि निवेश के विकल्पों में शामिल हैं। विशेषज्ञों की माने तो म्युचुअल फंड निवेश का सबसे बढ़िया विकल्प है। थोड़े पैसों से भी आप इस माध्यम से अपनी निवेश योजना की शुरुआत कर सकते हैं। म्युचुअल फंडों की विभिन्न प्रकार की योजनाएं होती हैं, तरलता और प्रतिफल की दृष्टि से भी ये बेहतर हैं।

इनकी कुछ योजनाएं ऐसी हैं जिनमें निवेश कर आप कर में भी बचत कर सकते हैं। म्युचुअल फंड में आपक ी मेहनत की कमाई का प्रबंधन पेशेवर प्रबंधक करते हैं। इसमें नियमित तौर पर निवेश कर आप एक खास समयावधि में धन-कोष का निर्माण करते हैं, साथ ही बाजार के अल्पावधि के उतार-चढ़ावों का आपके निवेश पर कम प्रभाव पड़ता है।

म्युचुअल फंड में निवेश के लिए आपके पास थोड़े से पैसे, निवेश की योजना, धैर्य और समय का होना जरुरी है।योजना बनाकर करें निवेश निवेश एक योजना के तहत की जानी चाहिए। अधिकांश निवेशक निवेश-प्रक्रिया की शुरुआत बिना उद्देश्य तय किए शुरु कर देते हैं, उन्हें यह भी पता नहीं होता कि पोर्टफोलियो में इक्विटी और ऋण किस अनुपात में रखा जाना चाहिए।

नए निवेशकों को कुछ बातों का ख्याल रखना चाहिए। अगर आप अपने निवेश करने की शुरुआत करना चाहते हैं तो अल्पावधि, मध्यावधि एवं दीर्घावधि के अपने एवं अपने वित्तीय लक्ष्यों को पहले तय कर लें। मान लीजिए कि आप दो साल बाद विदेश में छुट्टियां मनाने जाना चाहते हैं तो यह आपक ीअल्पावधि का लक्ष्य हुआ।

15 साल बाद पुत्री की शादी मध्यावधि के लक्ष्य के अंतर्गत आता है और सेवानिवृत्ति की व्यवस्था करना दीर्घावधि के लक्ष्यों में शामिल है। विभिन्न वित्तीय लक्ष्यों के आघार पर ही विभिन्न जगहों पर निवेश किया जाना चाहिए और इनमें अपनी जोखिम उठाने की क्षमताओं का भी खास खयाल रखा जाना चाहिए।पेशेवरों की मदद भी ले सकते हैंगलत तरीके से निवेश करने से बेहतर है कि कुछ पैसे खर्च कर आप निवेश सलाहकार की मदद लें।

एक पेशेवर और अनुभवी वित्तीय योजनाकार न केवल आपको निवेश की बेहतर योजना बता सकता है बल्कि यह भी बता सकता है कि आपको अपना लक्ष्य प्राप्त करने के लिए निवेश किन उपकरणों में करना चाहिए। सही निवेश सलाहकार की तलाश कीजिए। आजकल बाजार में निवेश सलाहकारों की कमी नहीं है, जरुरी नहीं कि सब के सब इस क्षेत्र के जानकार ही हों।लक्ष्यों के मामलों में समझौते न करेंकई लोग आपको ऐसे मिलेंगे जो बचत या निवेश तो अपने बच्चे की पढ़ाई के लिए कर रहे थे लेकिन कार खरीदने की ईच्छा हुई तो इन्हीं पैसों से कार खरीद लिया।

लक्ष्यों के साथ इस तरह के समझौते नहीं किए जाने चाहिए। कुछ मामलों में इस तरीके से पैसों की निकासी की जा सकती है, जैसे परिवार के किसी सदस्य की शल्य-क्रिया होनी हो और उसमें ज्यादा पैसे खर्च होने वाले हों। अगर ऐसी कोई आपातकालीन परिस्थिति न हो तो आपको अपने दीर्घावधि के लक्ष्यों पर अडिग रहना चाहिए।

छोटी-छोटी जरुरतों के लिए आप अन्य विकल्पों का सहारा ले सकते हैं।औरों के बहकावे में न आएंकभी कभार विशेषज्ञों की सलाह की जरुरत होना लाजिमी है। लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में एक निवेशक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। एक निवेशक अपने उद्देश्यों और अपनी जोखिम उठाने की क्षमताओं के बारे में जितना समझता है, कोई दूसरा नहीं समझता है।

जहां एक वित्तीय योजना सलाहकार निवेश के विक ल्पों के चुनाव और निवेश प्रक्रिया का निर्धारण करने में आपकी मदद करता है वहीं विभिन्न मानदंडों को निर्धारित करने में आपकी भूमिका महत्वपूर्ण होती है। किसी पड़ोसी या दोस्त आदि के बहकावे में आकर अपनी निवेश योजना में परिवर्तन न करें।

गारंटीड प्रतिफल बनाम म्युचुअल फंडकई निवेशक ऐसे होते है जिनकी चाहत गारंटीड प्रतिफल पाने की होती है। इस तरह के निवेशक सावधि जमाओं एवं आवर्ती जमाओं में अपने पैसे जमा करते हैं। म्युचुअल फंड जैसे निवेश के विकल्प उनको केवल इसलिए नहीं भाते क्योंकि इनका प्रतिफल गारंटीड नहीं होता है। निवेश से जुड़े जोखिम एवं अर्थव्यवस्था की अनिश्चितता से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन म्युचुअल फंड कंपनियों के अनुभव, शोध और विश्लेषण इतने अच्छे होते हैं कि विभिन्न वर्ग के निवेशक इसके माध्यम से अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं।

पेशेवर फंड प्रबंधकों की विशेषज्ञता से लाभ उठाने के लिए जरुरी है कि आप वैसे फंड में निवेश करें जिसका उद्देश्य आपके उद्देश्यों से मेल खाता हो। गारंटीड प्रतिफल के लिए म्युचुअल फंडों द्वारा पेश की जाने वाली कैपिटल प्रोटेक्शन ओरियेंटेड स्कीम ( सीपीओएफ ) का चुनाव किया जा सकता है।

जोखिम उठाना है तो शामिल कीजिए इक्विटी को, इक्विटी आपके पोर्टफोलियो का एक महत्वपूर्ण घटक होता है। इक्विटी में वह ताकत है तो दीर्घावधि में महंगाई को मात दे सकता है। इससे लाभ लेने के लिए जरुरी है कि आप नियमित रुप से स्टॉक में निवेश करते रहें। इक्विटी से अल्पावधि में लाभ की आशा न रखें। अगर आप म्युचुअल फंड के माध्यम से इक्विटी में निवेश करना चाहते हैं तो ऐतिहासिक तौर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले किसी भी इक्विटी फंड में सिप के माध्यम से इसकी शुरुआत कर सकते हैं।

बचत और निवेश में एक बड़ा फर्क है। बचत में हम पैसों की वृध्दि पर अधिक ध्यान नहीं देते। इसके तहत हमारा लक्ष्य केवल पैसे जोड़ने का होता है। निवेश में पैसों को बढ़ाने की ताकत होती है और इस महंगाई के जमाने में हर कोई पैसे बढ़ता देखना चाहता है। ध्यान रखने लायक बात यह होनी चाहिए कि आप निवेश के उन्हीं उपकरणों या विकल्पों का चयन करें जो आपकी लक्ष्य-प्राप्ति में आपके मददगार हो सकते हैं साथ ही जो आपकी जोखिम उठाने की क्षमता के अनुरूप हों।
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स्रोत : बीएस

Saturday, April 2, 2011

कैसा हो आपका वित्तीय सलाहकार!

अक्सर लोग ये सवाल पूछते हैं कि अच्छे वित्तीय सलाहकार को कैसे ढूंढ़ा जाए।

आपको ऐसे वित्तीय सलाहकार की जरूरत होती हो जो आपके पैसे की सुरक्षा के साथ-साथ कुछ बेहद जरूरी बातों पर भी खरा उतरे। यहां बताई गई 5 बातों पर ध्यान रखें जो आपको अच्छे वित्तीय सलाहकार को ढूंढने में मददगार साबित हो सकती है।

विश्वसनीय और भरोसेमंद

वित्तीय सलाहकार वो व्यक्ति होता है जो ना सिर्फ आपके, बल्कि आपके परिवार के हितों से भी जुड़ा होता है। अपने वित्तीय सलाहकार को अच्छी तरह जानें और देखें कि उसका व्यवहार कैसा है। अपने व्यक्तिगत मामलों में वो कितनी ईमानदारी बरतता है, (टैक्स भुगतान की जानकारी आदि)। इन सब बातों से आप निश्चित तौर पर उसके बारे में सही अनुमान लगा सकेंगे।

क्षमता

केवल भरोसेमंद होना ही काफी नहीं है। क्या आपके वित्तीय सलाहकार को सबसे बेहतर निवेश, बचत विकल्पों के उत्पादों की जानकारी है? इसके साथ ही उसे इस काबिल भी होना चाहिए कि वो आपको सबसे बढ़िया सलाह दे सके। आपको इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि क्या आपका वित्तीय सलाहकार सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर का कोर्स कर चुका है, इसके अलावा निरंतर अध्य्यन और रिसर्च के बारे में उसका क्या ख्याल है। याद रखें, अगर आपके वित्तीय सलाहकार को मौजूदा आर्थिक डेवलपमेंट और परिवर्तनों के बारे में जानकारी नहीं है तो आपको ही इसके नुकसान झेलने पड़ सकते हैं।

सेवान्मुख

आपके वित्तीय सलाहकार के अंदर आपको सबसे अच्छी सलाह देने की इच्छा होनी चाहिए। आपको अपने वित्तीय सलाहकार से सेवा के स्तर के बारे में अच्छी तरह पूछताछ करनी चाहिए। क्या कुछ ऐसी सेवाएं हैं जो आपके लिए जरूरी हैं और वो आपको उन सुविधाओं को मुहैया कराने में आनाकानी कर रहा है। अगर ऐसा है तो आपको दुबारा सोचना चाहिए। आपको ऐसे वित्तीय सलाहकार की जरूरत है जो अपने काम के लिए पूरी तरह समर्पित हो तभी वह आपको सबसे बेहतर निवेश सलाह दे सकता है।

ग्राहक प्रोफाइल

अपने वित्तीय सलाहकार के साथ कुछ समय बिताएं और देखें कि उसने आपसे पहले किन ग्राहकों को किस तरह की सेवाएं दी हैं। हो सकता है कि आपका वित्तीय सलाहकार नवीनतम सॉफ्टवेयर तकनीकों से भलीभांति परिचित हों और आप रिटायर्ड हैं और ई-मेल जैसे प्रमुख संचार माध्यमों का उपयोग करना नहीं जानते तो आपको कहीं और देखना पड़ सकता है।

मजबूत रेफरेंस

आपको देखना चाहिए कि आपके वित्तीय सलाहकार ने जिन क्लाइंट को अपनी सेवाएं दी हैं वो उनसे कितने संतुष्ट हैं। अगर आप व्यक्तिगत रूप से उनसे मिलकर संतुष्ट होते हैं तो आप बेहतर फैसला कर सकते हैं।

सबसे जरूरी है कि अपनी आंखे और दिमाग खुला रखके किसी वित्तीय सलाहकार को नियुक्त करें। याद रखें, थोड़ा कष्ट उठाने से आपको ही बेहतर चुनाव करने में काफी मदद मिल सकती है। अगर आपका पैसा सुरक्षित हाथों में जाता है तो आपको ही फायदा होगा। साथ ही वित्तीय सलाहकार के रूप में ही आपको एक दीर्घकालिक भरोसेमंद आर्थिक संबंधी भी मिल सकता है।
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स्रोत : moneycontrol

मजेदार तरीके से बचत के रास्ते!

मंदी शब्द सुनने में बहुत बुरा लगता है। वैश्वीकरण के दौर में एक देश की खराब अर्थव्यवस्था का असर औरों पर भी पड़ता है क्योंकि सीधे या अप्रत्यक्ष तौर पर सभी एक दूसरे से जुडे हुए हैं। अमेरिका में हो रहे थोड़े से बदलावों का असर काफी दूर तक पहुंच सकता है। तो ऐसे में ये देखना समझदारी होगी कि आपका पैसा कहां खर्च हो रहा है और आपकी मेहनत से कमाई हुई पूंजी का कैसे इस्तेमाल हो रहा है।

यहां हम आपको कुछ ऐसे छोटे मगर असरदार सुझाव बताएंगे जो आपको उचित रहन-सहन बनाए रखने में मदद करेंगे। साथ ही इनकी मदद से आप बचत करने के नए तरीकों और आदतों के बारे में भी सीख सकते हैं।

आप अपना पैसा कहां खर्च करते हैं ?
अगर आप घर के कमाऊ व्यक्ति हैं तो ये माना जा सकता है कि आपके मुख्य खर्चे घरवालों के भोजन, मनोरजंन और खरीदारी पर होते होंगे।

बाहर खाना-पीना
बाहर खाना-पीना जरूरत से ज्यादा फैशन बनता जा रहा है। लोगों के बढ़ते आलस, रोमांच या आदत के चलते आज रेस्त्रां इंडस्ट्री काफी तेजी से बढ़ रही है। जब आप बाहर खाते हैं तो आप बेहतर, सर्विस, गुणवत्ता और माहौल की अपेक्षा करते हैं। कठिनाई के समय में भी आप बाहर खाने के मजे कैसे उठा सकते हैं।

डिनर की बजाए लंच पर बाहर जाएं- बाहर खाना है तो डिनर की बजाए लंच पर भी अच्छे मेनू और बुफे का लुत्फ उठा सकते हैं।

अपने दोस्तों और संबंधियों से पूछें- कि हाल ही में उन्होंने किस बेहतर जगह खाना खाया था। इससे आप सस्ती और बढ़िया जगह ढूंढ सकते हैं।

बाहर जाने से पहले घर पर एक ड्रिंक का आनंद लें- अपने खाने का बिल आधा करने का ये एक अच्छा विकल्प है। आजकल कुछ रेस्त्रां भी हैप्पी आवर्स के रूप में ऐसी सुविधा मुहैया कराते हैं।

कैश वाउचर का इस्तेमाल करें- लोकल मैगजीन में आपको कुछ वाउचर मिल सकते हैं जिन्हें इस्तेमाल करके आप स्वादिष्ट भोजन का आनंद कम कीमत पर ले सकते हैं।

समूह में बाहर खाना खाने जाएं- पहली नजर में ये कुछ अटपटा लग सकता है, लेकिन बाहर खाना खाने में कंपनी भी मिल जाएगी और जब बिल आएगा तो कुछ बचत भी होगी

सप्ताहांत पर बाहर खाने से बचें- ज्यादातर जगहों पर वीकएंड में कवर/एंट्रैंस चार्ज होता है, साथ ही ज्यादा लोगों के चलते सेवाओं में भी कुछ देरी देखने को मिलती है।

मार्केटिंग संदेशों को डिलीट ना करें-. कई रेस्त्रां अपने ग्राहकों को डिस्काउंट देते हैं, अगर उनके पास एसएमस हों तो, तो अब से अपने मार्केटिंग संदेशों को डिलीट करने से पहले जांच लें।

ध्यान रखें- शुरूआत में एपेटाइजर मंगाएं और मेन कोर्स को दोस्त के साथ शेयर करें, मीठे को छोड़ा भी जा सकता है।

फैंसी जगहों का लालच छोड़ें- पास के ढाबे का खाना चखकर देखें-हो सकता है कि ढ़ाबे का खाने का स्वाद आपको हैरान कर दे और पैसे तो बचेंगे ही।

अतिरिक्त खाना-बचे हुए खाने को साथ में ले जा सकते हैं, रेस्त्रां का बचा खाना अगले दिन के लिए लंच का काम कर सकता है।

मनोरंजन :
लोकल अखबार और मैग्जीन देखें और जानें कि शहर में क्या हो रहा है- आप निश्चित तौर पर ये देखकर हैरान हो जाएंगे कि आपके शहर में कितनी सांस्कृतिक, साहित्यिक और आध्यात्मिक हलचल होती रहती हैं, वो भी हर सप्ताह। सबसे बड़ी बात है कि इसमें से कई मुफ्त होती हैं और कुछ की कीमत आपकी फिल्म की टिकट के आधे के बराबर हो सकती है।

अपने आप को किसी शौक में डुबोएं- इसके जरिए आप ना केवल नई चीजें सीख पाएंगे, बल्कि क्राफ्ट के अपने पुराने शौक को आजमा पाएंगे और नए लोगों से भी मिल पाएंगे। इसके जरिए आपको एक क्रियात्मक संतुष्टि भी मिलेगी और शायद आप कुछ नए लोगों से भी मिल सकते हैं।

अपने शहर को फिर से जानें- चाहें किसी लोकल पार्क में जाएं या किसी ऐतिहासिक जगह या संग्रहालय को देखने जाएं जिसे अब तक आपने जानने की जरूरत नहीं समझी थी।

फिल्म देखनी ही है तो हफ्ते के बीच में देखें- आमतौर पर फिल्म की टिकटें हफ्ते के बीच में सस्ती होती हैं, जैसे सोमवार या मंगलवार को।

घर पर ही मनोरंजन करें- अपने दोस्तों को घर बुलाएं, संगीत सुनें, खेल खेलते हुए मजेदार शाम का लुत्फ उठाएं।

खरीदारी :

चाहें घर का जरूरी सामान लाना हो या राशन, किराने का सामान, आप बाजार जाने से खुद को रोक नहीं सकते हैं। अगर आप बचत करने की सोच रहे हैं तो फालतू खरीदारी करने से खुद को रोकना ही होगा वर्ना बचत के बाकी सारे उपाय व्यर्थ हो सकते हैं।

हमेशा ब्राण्डेड उत्पादों के पीछे ना भागें- चाहें तो कुछ सस्ते उत्पाद भी खरीद सकते हैं जो आपके काम को पूरा कर सकते हैं।

इकट्ठा सामान खरीदें- अगर आप समझदारी से खरीदारी करें तो काफी बचत कर सकते हैं। लंबे समय तक चलने वाले उत्पाद जैसे साबुन, शैंपू, क्लीनिंग प्रोडक्ट को इकट्ठा खरीदने से आप एक बार बड़ा खर्च करते हैं, लेकिन लंबे समय तक खर्च से बच जाते हैं। अगर इन्हें किसी के साथ बांटते हैं तब आपकी लागत और भी कम हो सकती है।

केवल शौकिया खरीदारी के लिए बाजार ना जाएं-तभी खरीदारी करने की सोचें जब आपको वास्तव में जरूरत हो। सामान की लिस्ट बनाएं और जितना जरूरी हो उतना ही खरीदें।

रेडी टू ईट के जाल से बचें- ये ना तो सेहतमंद होते हैं और बजट को तो कई गुना बढ़ाते ही हैं।

परिवार के साथ शॉपिंग पर ना जाएं-अगर आपके युवा बच्चे हैं तो आपका बिल बढ़ता जाएगा और आपको पता भी नहीं चलेगा।

डिस्काउंट का फायदा उठाएं और फैक्ट्री आउटलेट पर पैसे बचाए-ऐसे स्टोर में कई बार आपको भारी वैराइटी आकर्षक दामों पर मिल सकती है।

मिक्स एंड मैच करके कपड़े खरीदें- अलग-अलग कपड़े खरीदना मतलब वॉर्डरोब को अनावश्यक भरना, और ऐसे सूट खरीदना जो काफी महंगे हों। बेहतर होगा कि मिक्स एंड मैच की रणनीति अपनाई जाए।

धोकर पहनने लायक कपड़े खरीदें- ड्राइ-क्लीनिंग महंगी भी होती है और पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक होती है क्योंकि इसमें सफाई के लिए पेट्रोलियम का प्रयोग होता है।

ऑनलाइन शॉपिंग दिलाए ज्यादा फायदा- इसके जरिए पेट्रोल भी बचता है और आपको सस्ती लागत पर उत्पाद मिल सकते हैं, क्योंकि ज्यादातर ऑनलाइन शॉपिंग पर छूट मिलती है।

सिर्फ सेल के लालच में खरीदारी करने ना निकलें- कई सेल में ऐसे उत्पाद बेचे जाते हैं जो घटिया क्वालिटी के होते हैं और आप उन्हें सस्ते नहीं बल्कि महंगे ही ले लेते हैं क्योंकि ये किसी काम के नहीं होते हैं। तो बेहतर होगा कि आप ऐसी लुभावनी सेल से दूर ही रहें।

तो कुल मिलाकर हमने यहां कई ऐसे उपाय बताए हैं जिनसे पैसे भी बचेंगे और जीवनशैली भी प्रभावित नहीं होगी। बस आपको थोड़ा सा होमवर्क करने की जरूरत है और कुछ समझदारी अपनाने की जरूरत है।
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स्रोत : Moneycontrol.com

क्यों है जरुरी फाइनेंशियल प्लैनिंग :

बाजार के उतार-चढ़ाव के चलते रिटेल निवेशकों को बचत को मुनाफे में बदलना मुश्किल हो सकता है। इसी वजह से फाइनेंशियल प्लैनिंग करने की सलाह दी जाती है। आजकल म्यूचुअल फंड में निवेश करने की सलाह दी जाती है क्योंकि इनमें शेयर बाजार की बेहतर समझ रखने वाले जानकार की सेवाएं मिलती हैं।

फ्रीडम फाइनेंशियल प्लैनर के सीईओ सुमित वैद्य के मुताबिक म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले निवेशकों को 80 फीसदी पूंजी इक्विटी फंड में और 20 फीसदी पूंजी डेट फंड में लगानी चाहिए। आमतौर पर इक्विटी फंड में 14-15 फीसदी और डेट फंड में 7-8 फीसदी के सालाना रिटर्न मिलते हैं। इस हिसाब से सालाना औसतन 12-13 फीसदी के रिटर्न का अनुमान लगाया जा सकता है।

18-20 साल बाद 1 करोड़ रुपये का रिटर्न

सुमित वैद्य के मुताबिक 18-20 साल बाद 1 करोड़ रुपये की रकम के लिए हर महीने करीबन 14,500 रुपये का निवेश करना चाहिए। इस लक्ष्य के लिए पोर्टफोलियो में रिलायंस ग्रोथ फंड, एचडीएफसी टॉप 100 फंड, एचडीएफसी टैक्स सेवर फंड, डीएसपी ब्लेकरॉक टॉप 100 फंड बिरला सनलाइफ इक्विटी फंड, एचडीएफसी हाई इंटरेस्ट-शॉर्ट टर्म फंड और टेंपलटन इंडिया शॉर्ट टर्म इनकम फंड को शामिल किया जा सकता है।

सुमित वैद्य के मुताबिक 20 साल बाद 80 लाख रुपये के लिए हर महीने 9,800 रुपये का एसआईपी करें। 25 साल बाद 1 करोड़ रुपये की रकम के लक्ष्य के लिए 6,500 रुपये की एसआईपी करें। इसके लिए लार्जकैप-मिडकैप फंड और डेट फंड का सही संतुलन बनाकर पोर्टफोलियो बनाया जा सकता है।

अच्छी मेडिक्लेम पॉलिसी

सुमित वैद्य के मुताबिक मेडिक्लेम पॉलिसी में मिलने वाली सुविधाओं और फीचर्स की पूरी जानकारी लेनी चाहिए। अच्छी मेडिक्लेम पॉलिसी में न्यू इंडिया मेडिक्लेम, बजाज आलियांज हेल्थ इंश्योरेंस और स्टार हेल्थ मेडी-क्लासिक के नाम लिए जा सकते हैं। मेडिकल पॉलिसी में क्रिटिकल इलनेस (गंभीर बीमारियों) के कवर राइडर अवश्य लेने चाहिए। इन्हें जोड़ने से प्रीमियम में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होती है लेकिन सुरक्षा अवश्य बढ़ सकती है।

अगर पूरे परिवार के मेडिकल इंश्योरेंस के लिए फैमिली फ्लोटर लिया है तो परिवार के मुख्य कमाने वाले को अपने लिए अलग से भी मेडिकल पॉलिसी लेनी चाहिए।

सुमित वैद्य के मुताबिक टर्म प्लान लेना काफी जरूरी है। व्यक्ति को अपने जीवन में टर्म प्लान अवश्य लेना चाहिए। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल का ऑनलाइन टर्म प्लान आई-प्रोटेक्ट इंडस्ट्री के सबसे सस्ते और अच्छे टर्म प्लान में से है।
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स्रोत : Moneycontrol

Friday, April 1, 2011

अच्छे आर्थिक योजनाकार को कैसे ढूंढ़े :

जब आप पेशेवर वित्तीय सलाह पाने का निर्णय करते हैं जो अपने आप में एक कठिन यद्यपि अच्छा निर्णय है तो आप स्वयं को अनेक विकल्पों से घिरा पाते हैं जैसे, सुप्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग विकल्प, अच्छे स्थापित घरेलू संपत्ति प्रबंधक और इसके अतिरिक्त आपके लिये निवेश सलाहकार के बुटिक भी उपलब्ध हैं। ये सभी एसेट एलोकेशन कर सकते हैं, सभी आपको उत्पादों की विशाल श्रंखला देने का वादा करते हैं और निस्सन्देह ये सभी अच्छी प्रस्तुति देने में सक्षम हैं।

सवाल यह है कि आपके पैसे का प्रबंधन सबसे अच्छी तरह कौन कर सकता है ?

बुटिक बनाम बङ़े ब्रांड में बेहतर कौन है, इसका कोई सीधा उत्तर नहीं है क्योंकि ये इस पर निर्भर करता है कि आप क्या खोज रहे हैं ? धन प्रबंधन करने से पहले आप स्पष्ट रूप से अपनी आवश्यकताओं को जानें। क्या आप अपनी सेवानिवृत्ति और प्रमुख खर्चों के लिये योजना वना रहे हैं या फिर नये और अनूठे धन उत्पाद जो आपने पहले प्रयोग नहीं किये, उन्हें खरीदने की सोच रखते है ? या शायद आप किसी की तलाश कर रहे हैं जिस पर आप भरोसा कर सकें।

अगर आप जानते हैं कि आपको क्या चाहिये तो उसे अवश्य पा सकते हैं।

यदि आपकी धन प्रबंधन की ज़रूरतें जटिल हैं तो एक बङ़ा ब्रांड आपको उन उत्पादों और समाधानों के विभिन्न स्तर तक पहुंचा सकता है। उदाहरण के लिये एक वैश्विक निवेश बैंक अपने विदेशी दफ्तरों के ज़रिये अंतर्राष्ट्रीय उत्पादों हेतु ऋण जोखिम प्रदान कर सकता है, जो एक बुटीक के द्वारा पेश करने की संभावना नहीं है। बड़े निजी बैंक, विशेष रूप से एक व्यवसाय के स्वामी को बैलेंस शीट की देनदारियों पर ऋण या जमानत दे सकते हैं जो काफ़ी महत्वपूर्ण है।

अगर आप एक बङ़े ग्राहक हैं तो निजी बैंक आपकी आवश्यकताओं के मुताबिक विशेष उत्पादों का निर्माण भी कर सकते हैं।

बड़े ब्रांड आम तौर पर एक उत्पाद प्रदाता की सिफारिश करने से पहले पूरी तरह परिश्रम करते हैं, जो अंतिम निवेशक को आराम के स्तर दे सकते हैं। हालांकि यह सब सुविधायें एक कीमत अदा करने पर मिलती हैं, लेकिन यहां पैसे के बारे में बात करना जरूरी नहीं है, बल्कि समय की बचत देखना ज़्यादा महत्वपूर्ण होगा।

जब आप किसी व्यक्तिगत आर्थिक योजनाकार या किसी धन प्रबंधन फर्म या बुटीक से कार्य कराते हैं तो यह संभावना होती है कि आपकी बात व्यापार के संस्थापक या निदेशक से होगी। जबकि एक समकक्ष बङ़े ब्रांड में जाने पर आपकी बात रिलेशनशिप मैनेजर से होगी जो वैसे तो काफी योग्य और अच्छे इरादों वाले होते हैं लेकिन उनका लक्ष्य जल्द से जल्द टर्नओवर को बढ़ाना होता है।

यदि आप किसी बङ़े ब्रांड के लिये जाएंगे तो आपको नये रिलेशनशिप मैनेजर से मिलना होगा या वह अधिक ऊंचे जोखिम की पेशकश करेगा। रिलेशनशिप मैनेजर अक्सर छोटी अवधि के लक्ष्यों को पूरा करने के प्रयास में रहते हैं जो एक ही वर्ष में आप को उच्च रिटर्न दे सकते हों, या फ़िर वे अपने इन्सेन्टिव बढ़ाने के लिये आपको ऊंचे कमीशन उत्पादों की ओर धकेलने की कोशिश करते हैं।

दूसरी ओर एक बुटीक के संस्थापक के पास दीर्घकालिक व्यापार का निर्माण करने के लिये मज़बूत इन्सेन्टिव वे होते हैं जो उन्हें ग्राहकों के जोखिम को लगातार नियंत्रित करने से ही मिलते हैं।

आपको ग्राहक के रूप में किस प्रकार की सुविधायें मिलनी चाहिये ? एक बङ़े ब्रांड में उतने ही बङ़े और ज़्यादा ग्राहक होंगे, जिसके कारण प्रत्येक को कम मूल्यवान माना जायेगा। वहीं एक बुटीक में प्रत्येक ग्राहक, मालिक के व्यापार का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा जिसकी वजह से ग्राहक को देखभाल और सुविधाओं का बेहतर स्तर मिलेगा। आपके वित्तीय मामलों को संभालने के लिये ब्रांड का सामाजिक मूल्य अच्छा होना चाहिये। अतः उनके लिये आप को महत्व देना आवश्यक होता है।

सभी कहते हैं कि आर्थिक योजनाकार तथा फ़ंड मैनेजर के साथ काम करने के लिये व्यक्तिगत भरोसे और विश्वास की बहुत आवश्यकता होती है। आप ना सिर्फ अपने पैसे का प्रबंधन ही किसी के हाथों में दे रहे हैं, बल्कि अपनी जिम्मेदारियां, डर और ज़रूरतें भी उसके साथ बांट रहे हैं।


एक बार एक ग्राहक ने मुझे बताया कि वह ऐसा फ़ंड मैनेजर चाहते हैं जो परिवार के सदस्य की तरह हो। यह सही भी है, क्योंकि आप किसी से साबुन नहीं खरीद रहे हैं बल्कि अपना पैसा उसके हाथों में सौंप रहे हैं।

अतः किसी को तलाश करें जिस पर आप भरोसा कर सकते हों, चाहे वह कोई भी हो, बुटिक या कोई ब्रांड। इतना ध्यान रखें कि वह विश्वसनीय होना चाहिये।
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Source : moneycontrol

11 वित्तीय संकल्प :

हम अपने दिनचर्या का अधिकांश समय पैसा कमाने में लगाते हैं, परंतु दुर्भाग्य की बात है कि हम अपनी वित्तीय योजना बनाने में बिलकुल समय नहीं दे पाते हैं। आज आवश्यकता है अपने जीवन को वित्तीय रूप से अधिक खुशहाल बनाने की। नए वर्ष के जोश में नए विचार एवं संकल्प जीवन में एक नया आयाम स्थापित करने में सहायक होते हैं... तो आइए इस नव वर्ष की शुरुआत हम कुछ वित्तीय संकल्पों के साथ करें -

1. बढ़ाएँ अपना वित्तीय ज्ञान : हमारा दुर्भाग्य रहा है कि हमें वित्तीय मामलों का ज्ञान स्कूल एवं कॉलेजों में नहीं मिल पाया है, जिस कारण हममें वित्तीय साक्षरता का अभाव है। वित्तीय साक्षरता से आशय वित्तीय मामलों जैसे अपने लिए उपयुक्त वित्तीय योजनाओं का निर्माण, वित्तीय उत्पाद में मौजूद रिस्क एवं रिटर्न की समझ, सही उत्पाद का चयन, उत्पाद प्रदाता कंपनी का चयन, रियल टैक्स रिटर्न आदि बातों को सही रूप से समझकर उचित वित्तीय निर्णय लेने से है। वित्तीय साक्षरता हमारे निज आर्थिक विकास की पहली सीढ़ी है। अतः अपना वित्तीय ज्ञान बढ़ाना बहुत ही जरूरी है।

2. करें इमरजेंसी फंड तैयार : हर व्यक्ति के जीवन में अनिश्चित घटनाएँ घटित होती रहती हैं, चाहकर भी हम अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग में इनका समावेश नहीं कर पाते हैं। इमरजेंसी फंड अनिश्चित घटनाओं के दौरान उत्पन्न वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति करने के साथ ही वित्तीय कमी से उत्पन्न होने वाली मानसिक प्रताड़ना से भी हमें बचाता है। हमें 4 से 6 माह के मासिक खर्च, लोन-ईएमआई, इंश्योरेंस पॉलिसी की सालाना प्रीमियम के योग बराबर इमरजेंसी फंड तैयार कर लेना चाहिए।

3 . कम करें लोन भार : हमें अपने वर्तमान लोन को रिव्यू करके यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि हमारे सभी लोन इसी श्रेणी के हैं, जिससे हमारी नेटवर्थ में वृद्धि हो सके एवं यदि हमें लगता है कि हमारे लोन हमारी नेटवर्थ को बढ़ाने में सहायक नहीं हैं तो हमें तुरंत उन्हें चुकाने की योजना बना लेना चाहिए। साथ ही हमें इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि किस प्रकार हम ब्याज के भार को कम कर सकते हैं।

4. पर्याप्त इंश्योरेंस कवर लें : बात चाहे लाइफ इंश्योरेंस की हो या हेल्थ इंश्योरेंस की, हममें से अधिकांश व्यक्तियों ने ये इंश्योरेंस तो ले रखे हैं, पर इनके कवर पर्याप्त नहीं हैं, जिसका मुख्य कारण है कि हम इंश्योरेंस में भी रिटर्न तलाशते हैं और रिस्क को अंडर एस्टीमेट करते हैं। अतः आवश्यकता यह है कि टर्म प्लान के जरिए पर्याप्त लाइफ इंश्योरेंस एवं बढ़ती हुई मेडिकल कास्ट को ध्यान में रखकर पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस लें।

5. प्रत्येक लक्ष्य के लिए बनाए बचत योजनाएँ : हर व्यक्ति के जीवन में अपने विभिन्ना लक्ष्य होते हैं, जैसे बच्चों की पढ़ाई-शादी, कार खरीदना, मकान खरीदना, रिटायरमेंट आदि। भविष्य के सभी लक्ष्यों का निर्धारण कर प्रत्येक लक्ष्य के लिए पृथक बचत योजना बनाएँ।

6. लक्ष्य-जोखिम क्षमता के अनुसार करें निवेश : हमें यह समझना चाहिए कि रिस्क एवं रिटर्न एक सिक्के के दो पहलु हैं एवं अधिक रिटर्न में रिस्क भी अधिक होती है। अतः हमें अपनी जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर निवेश करना चाहिए। साथ ही निवेश इस प्रकार से होना चाहिए कि जरूरत पड़ने पर कम से कम खर्चे में उसे भुनाया जा सके एवं हमारा निवेश महँगाई दर को मात देने में भी सक्षम हो।

7. टैक्स प्लानिंग सिर्फ टैक्स बचत तक सीमित न रखें : अधिकांश व्यक्ति जल्दबाजी में टैक्स बचत के तहत बिना अधिक विचार किए कहीं भी निवेश कर देते हैं। इससे टैक्स बचत तो हो जाती है, परंतु भविष्य की आवश्यकताओं की पूर्ति सही ढंग से नहीं हो पाती है। अतः टैक्स प्लानिंग करते समय न सिर्फ टैक्स बचत, बल्कि अपनी आवश्यकताओं, जीवन के लक्ष्य एवं जोखिम क्षमता को भी ध्यान में रखकर उचित साधनों में निवेश करना चाहिए।

8. बजटिंग करें : अपने विभिन्ना मद में होने वाले खर्चों का हिसाब-किताब रखें एवं समय-समय पर रिव्यू करें कि किस मद में खर्चे में कमी की जा सकती है, जिससे भविष्य के लक्ष्यों के लिए आप अपनी बचत को बढ़ा सकें।

9. लिखें अपनी वसीयत : सामान्यतः लोग 60 से 70 वर्ष की आयु के बाद ही वसीयत लिखने की योजना बनाते हैं एवं अधिकांश लोगों की मृत्यु बिना वसीयत लिखे ही हो जाती है, जिससे परिवार को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अतः 18 वर्ष की आयु से अधिक मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति जिनके पास संपत्ति/जीवन बीमा पॉलिसी है, उन्हें अपनी वसीयत आवश्यक रूप से लिखना चाहिए।

10. संपूर्ण वित्तीय व्यवहार कम से कम एक विश्वसनीय व्यक्ति को अवश्य बताएँ : कई बार हमने समाचार-पत्रों में पढ़ा है कि बैंकों में वर्षों से कई ऐसी जमा राशियाँ हैं, जिन पर किसी ने अपना क्लेम दर्ज नहीं कराया है, जिसका मुख्य कारण यह है कि परिवारजन को मृतक के वित्तीय व्यवहार की पूर्ण जानकारी नहीं होती है एवं ऐसी दशा में अपना पैसा ही अपने परिवारजनों के काम नहीं आ पाता है। अतः अपने वित्तीय व्यवहार कम से कम एक विश्वसनीय व्यक्ति को अवश्य बताएँ।

11. विशेषज्ञों से ही लें वित्तीय सलाह : आज यदि हम वित्तीय मामलों की बात करें तो हम ऐसे सेल्समैनों पर निर्भर हैं, जिनका हित किसी कंपनी विशिष्ट के वित्तीय उत्पादों को विक्रय करने में है न कि व्यक्ति विशेष की आर्थिक प्रगति में। अतः आज हमें ऐसे वित्तीय विशेषज्ञ की आवश्यकता है, जो प्रत्येक वित्तीय निर्णय के प्रभाव को समझकर व्यक्ति विशेष की परिस्थितियों के अनुसार वित्तीय सलाह दे सकें।

जब हम सभी कार्य करने के लिए विशेषज्ञों की मदद लेते हैं, जैसे स्वास्थ्य संबंधि परेशानियों के लिए डॉक्टर, भवन निर्माण के लिए आर्किटेक्ट, टैक्स संबंधि मामलों के लिए सीए़ एवं न्यायिक विषयों के लिए वकील, तो ऐसे में हमें अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर की सेवाओं का लाभ लेना चाहिए।