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Thursday, May 12, 2016

LIQUID FUNDS...AT A GLANCE

डेट फंड्स में निवेशः डेट फंड्स क्या होते हैं?
डेट फंड ऐसे म्युचुअल फंड हैं जो निवेशकों का पैसा डेट इंस्ट्रूमेंट्स में लगाते हैं। डेट इंस्ट्रूमेंट्स से मतलब - कॉल मनी, बॉन्ड, डिबेंचर्स, सरकारी सिक्योरिटीज, डिपॉजिट सर्टिफिकेट और कमर्शियल पेपर हैं। अलग अलग फाइनेंशियल लक्ष्यों के मुताबिक अलग अलग डेट फंड होते हैं।

डेट फंड कितनी तरह के होते हैं?
डेट फंड कई तरह के होते हैं जैसे लिक्विड फंड, अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंड, शॉर्ट टर्म फंड, गिल्ट फंड, इनकम फंड, क्रेडिट ऑप्युर्चनिटी फंड, मंथली इनकम प्लान और फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान।

लिक्विड फंड्स किसे कहते हैं?
बहुत कम वक्त के लिए निवेश करने वाले फंड लिक्विड फंड कहलाते हैं और लिक्विड फंड को मनी मार्केट फंड भी कहा जाता है। लिक्विड फंड में कुछ दिन से लेकर कुछ हफ्ते तक के लिए निवेश संभव होता है और अगर कुछ ज्यादा पैसा आ गया तो उसे इस फंड में शिफ्ट किया जा सकता है। इन फंड में कोई एक्जिट लोड नहीं लगता है। लिक्विड फंड से रकम तुरंत बैंक अकाउंट में ट्रांसफर हो जाती है और इन फंड्स में बहुत थोड़े वक्त के लिए निवेश कर सकते हैं। ये फंड बहुत कम वक्त की सिक्योरिटीज में निवेश करते हैं और इन सिक्योरिटीज में रकम डूबने का रिस्क ना के बराबर होता है। इनमें निवेश सबसे सुरक्षित लेकिन रिटर्न भी कम होता है।

Saturday, April 7, 2012

सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान(SIP)क्या है ?


SIP नियमित रूप से निवेश के सिद्धांत पर काम करता है। यह आपके आवर्ती जमा की तरह है जिसमें आप हर महिने कुछ छोटी राशि डालते हैं।

ये आपको एक बार में भारी पैसा निवेश करने की जगह म्यूचुअल फंड में कम अवधि का (मासिक या त्रैमासिक) निवेश करने की आजादी देता है। SIP आपको एक म्युचुअल फंड में एकसाथ 10,000 रूपये के निवेश की बजाय 1000 रूपये के 10 बंटे हुये निवेश की सुविधा देता है ।

Saturday, December 3, 2011

12-15 साल के निवेश हेतु म्यूचुअल फंड सर्वश्रेष्ठ विकल्प

हम और आप पैसा कमाने के लिए काफी मेहनत करते हैं। हम उस कमाई हुई रकम में से कुछ खर्च करते हैं और थोड़ा बचाते हैं। वैसे तो बचत के बहुत से ज़रिए है लेकिन हम चाहते हैं कि पैसा सिर्फ बचे ही नहीं बल्कि इसमें बढ़त भी होती रहे।

अगर आप सही जगह निवेश करते हैं तो आपकी हर महीने की छोटी से छोटी बचत एक दिन एक बहुत बड़ी रकम बनकर आपके पास वापस आ सकती है। इस काम के लिये आपको कुछ निवेश योजना बनाकर चलने की आवश्यकता है।

वर्तमान निवेश विकल्पों में म्युचुअल फंड पर काफ़ी अधिक विश्वास किया जा रहा है। वाइज इंवेस्ट एडवाइजर्स के सीईओ हेमंत रुस्तोगी ने सीएनबीसी आवाज़ के साथ इस पर चर्चा की और म्युचुअल फंड के बारे में बहुमूल्य जानकारी उपलब्ध करायी।

सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान(SIP)क्या है ?

SIP नियमित रूप से निवेश के सिद्धांत पर काम करता है। यह आपके आवर्ती जमा की तरह है जिसमें आप हर महिने कुछ छोटी राशि डालते हैं।

ये आपको एक बार में भारी पैसा निवेश करने की जगह म्यूचुअल फंड में कम अवधि का (मासिक या त्रैमासिक) निवेश करने की आजादी देता है। SIP आपको एक म्युचुअल फंड में एकसाथ 5,000 रूपये के निवेश की बजाय 500 रूपये के 10 बंटे हुये निवेश की सुविधा देता है ।

इससे आप अपनी अन्य वित्तीय जिम्मेदारियों को प्रभावित किये बिना म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं। SIP कैसे काम करता है ये बेहतर समझने के लिये आपको Rupee cost averaging और धन के जुङते रहने की शक्ति (power of compounding) को समझना जरूरी है।

Sunday, October 9, 2011

सोने (Gold) की चमक कभी फ़ीकी नहीं पड़ती :

भारतीयों को सोने (स्वर्ण) की खरीदारी के लिए जाना जाता है। भारतीय किसी भी अन्य देश के लोगों से अधिक सोना खरीदते हैं।   अमरिका, फ्रांस और जर्मनी कि सरकारों के पास कुल जितना सोना है उससे ज़्यादा सोना भारतीयों के पास है!

ज़ाहिर है, हम भारतीय सोने को बेहद प्यार करते हैं! लेकिन क्या सोने का निवेश के लिए प्रयोग किया जाता है? नहीं। जैसे कि हमने देखा, भारत का अधिकांश सोना आभूषणों के रूप में है - भारत में सोने की कुल मांग का लगभग 73% आभूषण बनाने के लिए प्रयोग होता है।

Monday, April 4, 2011

कर बचत और विकास के लिए सबसे बेहतर टैक्स सेवर कौन...........

एचडीएफसी टैक्ससेवर :

पिछले 14 वर्ष की लंबी अवधि में लगभग हर साल (वर्ष 1999 और 2002 को छोड़कर) अपनी प्रतिस्पद्र्घी कंपनियों को मात देने के बाद फिलहाल यह फंड उसी स्थिति में आ गया है, जिस स्थिति में वर्ष 2007 की चौथी तिमाही में था। वह एकमात्र वर्ष था जब एस ऐंड पी सीएनएक्स 500 में इसका प्रदर्शन कमजोर रहा था। लेकिन अगले ही वर्ष तिमाही नतीजों के मामले में यह शीर्ष पर जा पहुंचा।इसने वर्ष 2008 के न्यूनतम स्तर से उबरकर वर्ष 2009 में तकरीबन 100 फीसदी प्रतिफल दिया।
फिलहाल इस फंड की लगभग आधी परिसंपत्ति बड़ी पूंजी वाली कंपनियों (लार्ज-कैप) में लगी है। ऐसा हमेशा नहीं होता। यह कुछ उन चुनिंदा फंडों में शामिल है, जिनका निवेश स्टैंडर्ड चार्टर्ड पीएलसी की भारतीय डिपॉजिटरी प्राप्तियों में है।

इसकी गिनती ऐसे फंडों में भी होती है, जिनके पोर्टफोलियो में रिलायंस इंडस्ट्रीज शामिल नहीं है। खंडवार आवंटन के बावजूद यह विपरीत दिशा में नहीं जाती। वर्ष 2009 में, जब दूसरे फंड ऊर्जा क्षेत्र में निवेश कर रहे थे, इस फंड ने इस क्षेत्र में केवल 10 फीसदी निवेश किया।

फंड की परिसंपत्ति बढ़ते जाने की वजह से फिलहाल शेयरों की संख्या 55 हो गई है, जो वर्ष 2007 में लगभग 40 थी। बहरहाल, फंड में ऐसे शेयरों की संख्या 23 है, जिनमें 1 फीसदी से कम निवेश है। इन शेयरों में कुल मिलाकर 10 फीसदी निवेश है। निवेश के हिसाब से शीर्ष 5 शेयरों में कुल 22 फीसदी निवेश है। इस तरह इस फंड की विविधता अच्छी है।

आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल टैक्स प्लान


लगभग 11 वर्षों की अवधि के दौरान, इस फंड ने मिलाजुला प्रदर्शन किया है। अपवाद स्वरूप छोटी एवं मझोली कंपनियों में निवेश से कुछ साल बढिय़ा प्रतिफल मिला, लेकिन बाजार में गिरावट की स्थिति में इन शेयरों में निवेश की वजह से कई बार नुकसान भी उठाना पड़ा है। वर्ष 2009 में यह फंड 112 फीसदी प्रतिफल देकर शीर्ष पर जा पहुंचा था।

इस फंड के पोर्टफोलियो में बड़ी और मझोली कंपनियों के शेयर हैं। यह फंड बड़ी कंपनियों के शेयरों की प्रमुखता वाला नहीं है, लेकिन ऐसा वक्त आएगा, जब इसके पोर्टफोलियो में बड़ी कंपनियों के शेयरों की भरमार होगी।

वर्ष 2007 के दौरान कई क्षेत्रों में निवेश का प्रदर्शन प्रतिकूल रहा था। इसके पोर्टफोलियो का पांचवां हिस्सा एफएमसीजी और हेल्थकेयर है और इसमें धातु और ऊर्जा क्षेत्रों के शेयरों की कमी थी। ऐसा इसलिए था क्योंकि इसके प्रबंधकों को लगता है कि तेल एवं गैस क्षेत्र के शेयरों की कीमतों में जरूरत से ज्यादा उछाल आई थी, जबकि एफएमसीजी और फार्मा क्षेत्र प्रदर्शन क्षमता से कमतर रही थी। लेकिन, जब वर्ष 2008 में मंदी शुरू हुई, यह फंड औसत से 56 फीसदी नीचे चला गया।

इस क्षेत्र ने एक दांव खेला और बड़ी कंपनियों के शेयरों में निवेश किया, जिसकी वजह से नकदी और ऋण एक्सपोजर लगभग 8 फीसदी के स्तर पर आ गया। इसलिए, वर्ष 2009 में जब बाजार में तेजी शुरू हुई, यह फंड अच्छी स्थिति में लौट आया।

इस फंड के पोर्टफोलियो में 65 शेयर हैं, जिनमें से शीर्ष 5 कंपनियों के शेयरों में कुल मिलाकर 22 फीसदी निवेश है। अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश 20 फीसदी तक सीमित है और इसमें 5 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होती। कुछ बड़ी कंपनियों के शेयर इसके अपवाद हैं। पोर्टफोलियो के आधे शेयर बड़ी कंपनियों के हैं। इसके अलावा मझोली और छोटी कंपनियों के शेयरों की संख्या भी कम नहीं है। नतीजतन बाजार गिरने की सूरत में इसे ज्यादा परेशानी नहीं होगी।

रेलिगेयर टैक्स प्लान

इस फंड ने छोटी अवधि में शानदार प्रदर्शन किया है। इसने बाजार में गिरावट वाली स्थिति में बेहतर प्रदर्शन की अपनी क्षमता दिखा दी है। यही वजह है कि निवेशकों को लंबी अवधि में इसका फायदा होगा।

यह फंड बाजार के तमाम क्षेत्रों में निवेश करता है और इस काम में बॉटम-अप एप्रोच का इस्तेमाल करता है। इसका 60 फीसदी निवेश मझोली और छोटी कंपनियों के शेयरों में है। इस फंड में कुल मिलाकर लगभग 35 कंपनियों के शेयर हैं। कुछ लोगों को आशंका थी कि वर्ष 2008 की गिरावट के दौर में यह फंड बढिय़ा प्रदर्शन करेगा। लेकिन यह तकरीबन 50 फीसदी गिरकर कैटेगरी औसत से 6 फीसदी नीचे आ गया, जो बीएसई 100 से कम था।

दरअसल, शेयरों के चयन का तरीका बिलकुल अलग था। वर्ष 2008 के दौरान इसके पोर्टफोलियो में 38 कंपनियों के शेयर थे। इनमें से 16 में सेंसेक्स से ज्यादा गिरावट दर्ज की गई थी। इस फंड ने बॉटम-अप चयन पर फोकस किया था।

फिलहाल यह फंड मल्टी-कैप रणनीति पर चल रहा है। पोर्टफोलियो में बीएसई के स्मॉल-कैप और बीएसई के पीएसयू सूचकांकों के कुछ शेयरों को भी शामिल किया गया है। हर तिमाही में पोर्टफोलियो की समीक्षा
की जाती है।
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स्रोत : बीएस

Tuesday, March 22, 2011

शेयर निवेश – प्रत्यक्ष (सीधा) निवेश बनाम म्यूच्युअल फंडस् (Mutual Funds – MFs)

आप एक चतुर निवेशक हैं। आप ने व्यक्तिगत वित्त और निवेश के बारे में बहुत कुछ पढ़ा है, और इसलिए आप को अच्छे से पता है कि लंबे समय में सभी परिसंपत्ति वर्गों के बीच शेयर (इक्विटी - equity) निवेश मुद्रास्फीति को पीछे छोड़ता हुआ सबसे अच्छा रिर्टन देता है।

आपको कुछ दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्यों के लिए बचत की जरूरत है, और जाहिर है, शेयर आपकी पहली पसंद हैं। अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आप एक अनुशासित ढंग से निवेश करने का फैसला करते हैं। तो, आप एक डीमेट खाता और एक ट्रेडिंग खाता खोलते हैं और शेयरों में निवेश शुरू करते हैं। 

सवाल यह है कि क्या यह सही दृष्टिकोण है? आपको शेयरों में सीधे निवेश करना चाहिए, या विशेषज्ञों की मदद लेना चहिये?

खैर, हर एक व्यक्ति के लिए जवाब दूसरे व्यक्ति से भिन्न होता है। तो चलिये, शेयर निवेश के इन दोनों तरीकों की तुलना करते हैं, जिस की मदद से आपको अपना जवाब मिल जायेगा!

पहलू १ – समय 

बहुत से छोटे निवेशक शेयरों में अल्पकालीन समय के लिये टिप्स (tips) और अफवाहों (rumours) के आधार पर निवेशकरते हैं , जो निवेश की सबसे अनुचित रणनीति है। यह ट्रेडिंग (trading) है, और यह पद्धति केवल ट्रेडर्स के लिए ही योग्य है। ये वो लोग हैं जो बड़ी पूंजी का निवेश बड़ी शेयर खरीदी (लार्ज पोजिशन – large position) के लिए करते हैं। ऐसे में एक शेयर की कीमत में ५ पैसे की वृद्धि भी उनके लिए बहुत लाभदायक होती है। लेकिन छोटे निवेशकों के लिए यह एक हारी हुई बाज़ी है।

 शेयरों में निवेश केवल लंबे समय के लिए किया जाना चाहिए - कंपनी की रणनीति (strategy) और प्रबंधन (management) की सुदृढ़ता ध्यान में रखते हुए। इसलिए शेयरों में निवेश के लिये अनुसंधान (रिसर्च - research) की बहुत जरूरत है। इस में शामिल है बुनियादी विश्लेषण (फंडामेंटल ऐनालिसिस – fundamental analysis) – जो कि एक अध्ययन है बुनियादी कारकों का जो कि एक कंपनी के कार्य और परिणाम को प्रभावित करते हैं। इन कारकों में शामिल हैं उद्योग (industry or sector) जिस में कंपनी काम करती है, उद्योग की विकास दर (growth rate), घरेलू और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा (competition), समग्र आर्थिक परिदृश्य (ब्याज दर, मुद्रास्फीति, विनिमय दर), आदि।

 

यह विश्लेषण या अनुसंधान सिर्फ शेयर चुनने से पहले नहीं कि जानी चाहिए, बल्कि निवेश की पूरी अवधि के दौरान लगातार नज़र रखने के लिये भी चाहिये। इस तरह के अनुसंधान के लिये समय के भारी निवेश की ज़रूरत है। क्या आप, एक छोटे से निवेशक, के पास इतना अतिरिक्त समय है?

पहलू २ – विशेषज्ञता (Expertise)

 

एक कंपनी के विश्लेषण के लिये आवश्यकता है मूल्यांकन (valuation) और लेखांकन (accounting) के सिद्धांतों के संपूर्ण ज्ञान की, और विभिन्न वित्तीय अनुपातों (ratios) जैसे आर. . . (RoE – Return on Equity), आर. . सी. . (RoCE – Return on Capital Employed), आर. . एन. . (RoNW – Return on Net Worth), आदि की व्याख्या की। कंपनियों के ताज़ा वित्तीय परिणामों और अन्य वित्तीय जानकारी की भी आवश्यकता होगी।
बुनियादी विश्लेषण में कंपनी जिस उद्योग (sector) में काम कर रही है उसके ज्ञान की भी आवश्यकता होगी।
क्या आप के पास इस तरह की पहुंच और विशेषज्ञता है?

पहलू ३ – सौदा लागत (Transaction Cost)

एक छोटे निवेशक के रूप में आप के सौदे की मात्रा / मूल्य बहुत मामूली होगी। इसका मतलब है कि ज़्यादातर दलाल (brokers) आप से सबसे ज़्यादा दलाली प्रभार (brokerage) वसूल करेंगे। ध्यान रखें - जैसे-जैसे सौदे का मूल्य बढ़ेगा, दलाली लागत उसके प्रतिशत के रूप में घटती रहेगी।
इस सौदे की लागत का आपके अंतिम रिटर्न पर सीधा और महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। क्या आप इस के लिए तैयार हैं?

पहलू ४ – प्रतिक्रिया की गति (Reaction Speed)

अगर आर्थिक कारकों में अचानक कोई परिवर्तन आता है, और यह कंपनी को प्रभावित करते हैं, तो क्या आप शांत और तटस्थ भाव से सोच पाने में सक्षम होंगे? क्या आप त्वरित कार्रवाई और प्रतिक्रिया के लिए सक्षम होंगे?

पहलू ५ – निवेश पर नियंत्रण

आप के लिये नियंत्रण” (control) कितना महत्वपूर्ण है? क्या आप फैसला करना चाहते हैं कि कितना निवेश कहाँ करना है? या आप अपने निवेश के लिए एक बाहरी विशेषज्ञ पर भरोसा कर सकते हैं?

म्यूच्युअल फंड (Mutual Fund – MF) के जरिए निवेश के लाभ

१. उनके पास अनुभवी निधि प्रबंधक (fund managers) होते हैं, जिनको शेयर बाजारों की अच्छी समझ होती है।
२. म्यूच्युअल फंडस् में शोधकर्ता (researchers) होते हैं जिनको विभिन्न उद्योगों की गूढ़ जानकारी होती है। उनको विभिन्न मूल्यांकन सिद्धांतों की भी अच्छी तरह से समझ होती है।
३. इन विशेषज्ञों का पूर्णकालिक काम ही कंपनियों का अनुसंधान है, इसलिए ज़ाहिर है कि वह बेहतर तरीके से अच्छी कंपनियों की पहचान कर सकते हैं।
४. म्युचुअल फंड के शोधकर्ता अक्सर कंपनियों के प्रबंधन (management) से सीधे बात करते हैं। इसलिये उनको कंपनी की रणनीति (strategy) की बेहतर समझ होती है।
५. म्युचुअल फंडस् कई निवेशकों से पैसा जमा करते हैं, और उनकी ओर से सामूहिक रूप से निवेश करते हैं। जहिर है इसके परिणामस्वरुप वे बड़े सौदे करते हैं, जिसकी वजह से सौदों की लागत काफ़ी कम लगती है।
६. म्यूच्युअल फंड पैसे की बहुत बड़ी रकम प्रबंधन (manage) करते हैं, क्योंकि वह बहुत से निवेशकों से छोटी राशियाँ जमा करते हैं। इस पैसे को कई अच्छी कंपनियों में निवेश किया जाता है। इसका मतलब यह है कि यदि आप म्यूच्युअल फंड में निवेश करते हैं, तो आप बहुत अच्छी तरह से थोड़ी राशि के साथ भी निवेश में विविधता (diversification) ला सकते हैं।
यदि आप के पास रू 10,000 निवेश करने के लिये हैं, तो शायद आप 2-3 अच्छी कंपनियों के कुछ शेयरों को खरीद सकते हैं। यह निश्चित रूप से विविधता (diversification) नहीं है! लेकिन इसी राशि के साथ आप एक विविध इक्विटी म्युचुअल फंड (diversified mutual fund) के यूनिटों (units) को खरीद सकते हैं, और आपका एक अच्छा विविध पोर्टफोलियो (diversified portfolio) होग!
७. चूंकि म्यूच्युअल फंडस् कोष प्रबंधकों (fund managers) द्वारा प्रबंधित होते हैं जिनका काम ही पैसे का प्रबंध करना है, वह अचानक घटी घटनाओं पर सही समय पर प्रतिक्रिया कर सकते हैं।

कृपया म्युचुअल फंड में निवेश के निम्नलिखित नुकसान को भी ध्यान में रखें

१. नियंत्रण का अभाव: एक बार जब आप निवेश कर देते हैं, एक निवेशक के रूप में आप का कोई नियंत्रण नहीं होता है कि कहां आपके पैसों का निवेश किया गया है – यह निवेश म्युचुअल फंड योजना के निवेश के सिद्धांत पर आधारित होगा।
(ध्यान दें: यह वास्तव में म्युचुअल फंड में निवेश के लिए प्राथमिक कारण हो सकता है - जब आप के पास समय और विशेषज्ञता नहीं है और आपको विशेषज्ञों पर विश्वास है, तो क्यों न उन्हें अपके पैसे का प्रबंधन करने दें!)
इसलिए, आप को म्युचुअल फंड योजना का चयन सावधानी से करना चाहिए, ताकि आपके उद्देश्य उसके निवेश के उद्देश्यों के साथ मेल खाते हों।
यदि आपको विश्वास है कि किसी विशेष क्षेत्र (specific sector) का भविष्य में अच्छा प्रदर्शन रहेगा, तो आप ऐसी म्युचुअल फंड योजना में निवेश कर सकते हैं जो उस क्षेत्र में विशेष रूप से निवेश करती हो - आप एक क्षेत्र फंड (sector fund) में निवेश कर सकते हैं। इस तरह की योजनाएँ काफी जोखिम के साथ आती हैं, क्योंकि उनके निवेश में विविधता (diversification) नहीं है। लेकिन जब आप म्युचुअल फंड में निवेश करते हैं तो आप के पास यही अधिकतम नियंत्रण है।
२. कोई अनुकूलन (customization) नहीं: चूँकि म्यूच्युअल फंड के पास कई ग्राहक होते हैं, वह अपने निवेश को हर ग्राहक के अनुसार अनुकूलित (customize) नहीं कर सकते।
३. प्रबंधन शुल्क (management fee): म्यूच्युअल फंडस् वार्षिक प्रबंधन शुल्क लेते हैं। म्युचुअल फंड अपने निवेश के लिए किये जाने वाले अनुसंधान और अन्य लागत को वसूलने के लिए यह शुल्क लगते हैं। चूंकि यह एक वार्षिक शुल्क है, इसका आपके रिटर्न पर प्रभाव पड़ेगा।
लेकिन, हम यह भी कह सकते हैं कि इस पैसे का उपयोग गहन अनुसंधान के लिये किया जाता है, और इसलिए यह आपके निवेश पर बेहतर रिटर्न प्रदान करता है!

निष्कर्ष

अब आप को म्युचुअल फंड में निवेश के लाभ और कमियां पता हैं। आप यह फैसला करने की बेहतर स्थिति में हैं कि आप शेयरों में सीधे निवेश करना चाहते हैं या म्युचुअल फंड के रास्ते जाना चाहते हैं! यह कुछ पहलू हैं जो आपकी मदद करेंगे तय करने में कि निवेश सीधे शेयर बाज़ार में किया जाए कि म्युचुअल फंड (म्यूच्युअल फंड) में।
एक छोटे निवेशक के बारे में विचार करने पर हम पाते हैं कि वह एक पूर्णकालिक नौकरी (full time job) करता है, और वह केवल अपने वित्तीय लक्ष्यों को हासिल करने के लिए निवेश करता है। वह मूल्यांकन (valuation) और लेखा (accounting) का विशेषज्ञ नहीं होता। उसके पास कंपनियों के गहरे अनुसंधान के लिए भी समय नहीं होगा ।
तो, एक सामान्य सिद्धांत के रूप में, छोटे निवेशकों के लिए उचित यह है कि म्युचुअल फंड के ज़रिए निवेश करें।
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Source : paisaplanner

एसआईपी........स्लीप इन पीस

स्लीप इन पीस का क्या मतलब है ?

स्लीप इन पीस (एसआईपी) एक नियमित बचत व निवेश प्लान है जो आपको हर महीने थोड़ी सुनियोजित बचत करने में मदद करता है. इन सबसे आपको मिलती है मन की शांति.

स्लीप इन पीस आपको कैसे मदद करता है ?

* हर महीने आप बचत करते हैं, इससे एक अनुशासन का भाव पैदा होता है
* आपको चक्रवृद्धि की शक्ित का लाभ लेने में मदद करता है
* भावुकता से प्रेरित बाज़ार निवेशों से बचाने में मददगार. यह सुनिश्चित करता है कि आप हर महीने निवेश करें माह दर माह. इससे आपको ""औसत मूल्य'' पर खरीदने में मदद मिलती है और केवल ऊँची कीमतों पर खरीदने का जोखिम दूर करता है
* नियमित बचत आपको नियोजित और अनियोजित खर्चों के लिए तैयार रहने में मदद करती है
* सुिवधा देता है - एक फॉर्म भरकर आप हर महीने िनवेश कर सकते है

सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान :

सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेन्ट प्लान (एसआईपी) एक अनुशासित तरीके से लंबी अवधि के दौरान संम्पत्ति सृजन करने का एक अनुशासित तरीका है. यह आपको नियमित रूप से छोटे-छोटे निवेश करने में मदद करता है जिससे आप समय के साथ सम्पत्ति का सृजन कर सकते हैं.

एसआईपी किसी म्यूच्युअल फंड्‌स योजना में निवेश करने का एक तरीका है. म्यूच्युअल फंड योजनाएं एसेट मैनेजमेन्ट कंपनियों (एएमसी) द्वारा ग्राहकों को किसी डिस्ट्रीब्यूटर के जरिए पेश की जाती हैं. ग्राहकों तक म्यूच्युअल फंड की योजनाओं को पहुंचाने के लिए बैंक द्वारा एएमसी के डिस्ट्रीब्यूटर की भूमिका निभायी जाती है. म्यूच्युअल फंड योजना में निवेश के इच्छुक ग्राहक द्वारा ऐक्सिस बैंक के जरिए सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेन्ट प्लान का विकल्प चुना जा सकता है.

Monday, March 21, 2011

म्यूचुअल फंड्स.....................फंड्स के प्रकार

म्यूचुअल फंड्स........फंड्स के प्रकार
संरचना द्वारा:

सतत खुली
ये ऐसी स्कीमें हैं जिनकी कोई तयशुदा परिपक्वता नहीं होती. म्यूचुअल फंड सतत - खुले फंडों की यूनिट के लिए बिक्री व पुनर्खरीद मूल्य की घोषणा द्वारा नकदीकरण सुनिश्चित करता है.

सतत बंद
ये स्कीमें तयशुदा परिपक्वता की होती हैं. निवेशक का धन एक अवधि के लिए अवरूद्ध हो जाता है. कभी-कभी सतत-बंद स्कीमें निवेशकों को एक विशिष्ट अवधि के लिए या किसी विशिष्ट अविध के बाद पुनर्खरीद विकल्प प्रदान करती हैं. इन स्कीमों में नकदीकरण एक स्टॉक मार्केट में सूचीयत के जरिए प्रदान किया जाता है. तथापि यह विकल्प भारत में उपलब्ध नहीं है.

निवेश उद्देश्य द्वारा :


इक्विटी स्कीम्स
इक्विटी स्कीम्स मुख्यत: शेयर्स में निवेश करते हैं. उद्देश्य के आधार पर निवेश ग्रोथ स्टॉक्स में किए जा सकते हैं जहाँ आय वृद्धि ऊँची रहने की अपेक्षा की जाती है या फिर वैल्यू स्टॉक्स में निवेश किया जाता है जहाँ फंड प्रबंधक का नजरिया ये होता है कि बाजारों में मौजूदा मूल्यांकन अंतिर्निहत मूल्य से प्रितबिंबित न हों. विभिन्न प्रकार का इक्विटी स्कीमें इस प्रकार हैं

* इक्विटी वैनिध्यीकृत :
सभी नॉन-थीम और नॉन-सेक्टर फंड्स को इक्विटी विविधीकृत फंड्स के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है.
* मिड कैप:
ये फंड विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियों में निवेश करते हैं. तथापि वे कंपनी के बा़जारगत पूँजीकरण की दृष्टि से प्रतिबंध लगा देते हैं यानी वे मोटे तौर पर बीएसई मिड कैप स्टॉक्स में निवेश करते हैं.
* ईएलएसएस:
ईएलएसएस एक सतत-खुली इक्विटी ग्रोथ स्कीम है जो मौजूद ईएलएसएस दिशानिर्देशों के अनुसार म्यूचुअल फंडों द्वारा की जाती है. इस प्रकार की स्कीम के तहत किए गए निवेश 3 वर्ष की लॉक इन अविध के अधीन होती है और वित्त विधेयक 2005 के अनुसार इनमें रु. 1,00,000 तक आय कटौती के लाभ की अनुमित होती है.
* थीमैटिक (ध्येयात्मक) :
ये स्कीमें विभिन्न क्षेत्रों में निवेश करती हैं लेकिन स्वयं को विशिष्ट ध्येय तक सीमित रखती हैं. उदा. सेवा, निर्यात, उपभोक्तावाद इत्यादि.
* क्षेत्र विशेष :
ये स्कीमें विशिष्ट क्षेत्र में निवेश करती हैं. उदाहरण के लिए आईटी. इनके साथ उच्च स्तर का जोखिम जु़डा होता है क्योंकि यदि उन विशिष्ट क्षेत्रों में अच्छा कार्य निष्पादन नहीं हो पाता है तो उनका प्रतिफल प्रभावित होगा.
* फ्लेक्सीकैप :
इस प्रकार की स्कीमें मार्केट कैप्स में निवेश करती है.

डेब्ट या इनकम स्कीम्स
ऐसा फंड ब्याज देनेवाली प्रतिभूतियों मुख्यत: सरकारी प्रतिभूतियो और कॉर्पोरेट बॉण्ड्स में निवेश करता है. यह फंड प्रतिभूतियों के व्यापार पर लाभ तथा उनके निवेशों पर ब्याज आय से अपने निवेशकों के लिए प्रतिफल अर्जित करता है. जोखिम की दृष्टि से इस प्रकार का फंड कम जोखिम भरा होता है.
 
मनी मार्केट स्कीम्स
ये स्कीम्स सरकार, कॉर्पोरेट या बैंकों द्वारा जारी अल्प कालिक डेट लिखतों में निवेश करती हैं. ये सीपी और सीडी जैसे अल्प कालिक पत्रों में विशिष्ट रूप से किए गए निवेश हैं.

हायब्रिड स्कीम्स

* संतुलित स्कीम्स:
संतुलित स्कीम्स इक्विटी और डेब्ट के मिश्रण में निवेश करती हैं. डेट निवेश एक मौलिक ब्याज, आय सुनिश्चित करते हैं, जिसे फंड प्रबंधक इक्विटियों में निवेश से पूँजीगत लाभ के साथ शीर्ष पर पहुँचने की आशा करता है. तथापि हानियाँ मूल ब्याज आय और पूँजी में समाहित हो सकती हैं.
* मासिक आय योजनाएँ:
एमआईपी पंरपरागत निवेशकों के लिए उपयुक्त हैं जो डेब्ट में निवेश के साथ इक्विटियों में भी थो़डा निवेश करने से नहीं झिझकते. इन फंडों का लक्ष्य होता है डेब्ट मार्केट लिखतों में अपने पोर्टफोलियों का एक ब़डा हिस्सा और इक्विटियों में थो़डा सा निवेश करके प्रतिफल में सातत्य प्रदान करना. इस तरह से एमआईपी परंपरागत निवेशकों के लिए उपयुक्त होंगे जो पूँजी की सुरक्षा के साथ थोड़ा पूँजी वर्धन भी करना चाहते हैं, क्योंकि एमआईपी इक्विटियों में निवेश करते हैं तथापि मासिक आय सुनिश्चित नहीं होती है.
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Source : axisbank

म्यूच्युअल फंड्स में निवेश के फायदे............

म्यूच्युअल फंड्स में निवेश के फायदे
  • पेशेवर प्रबंधन:
    आस्ति प्रबंधन कंपिनयाँ (एएमसी) पेशेवर लोगों द्वारा प्रबंधित की जाती है और विशेष निवेश गतिविधि चलाती है.
  • वैविध्यीकरण:
    अनेक निवेशों के बीच वैविध्यीकरण से किसी भी एकल धारिता का जोखिम घटाने में मदद मिलती हैं.
  • सुविधाजनक प्रशासन :
    सेवा केंद्रो तथा इंटरनेट के जरिए निवेश करने की सुविधा आराम का भरोसा दिलाती है.
  • प्रतिफल की क्षमता:
    सही अस्ति मिश्रण आबंटित करके म्यूच्युअल फंड्स उच्चतर संभावित प्रतिफल का मौका देते हैं. जोखिम भरी आस्तियों की उच्च बहुलता से उच्चतर प्रतिफल देगी और अन्यथा इसके उलट होगा.
  • कम लागत :
    इसके आकार को देखते हुए एएससी अपने निवेशों की बिक्री और खरीदारी के लिए बेहतर दलाली की शर्तों पर चर्चा करने की स्थिति में होगा.
  • नकदीकरण:
    सतत खुली स्कीमें निरंतर बिक्री और पुनर्खरीद सुविधा के जरिए नकदीकरण प्रदान करती है. इस तरह से निवेशक को अपने निवेशों के लिए कोई खरीदार ढूँढने की चिंता नहीं करनी पडती.
  • पारदिर्शता:
    तथ्य पत्रकों, प्रस्ताव दस्तावेजों, वार्षिक प्रितवेदनों और प्रमोशनल सामग्रियों के जरिए उपलब्ध जानकारी निवेशक को उनके निवेशों के बारे में ज्ञान देने में मदद करती हैं.
  • लौचिकता:
    म्यूच्युअल फंड्स ऐसी स्कीम चुनने की लौचिकता प्रदान करते हैं जो निवेशक के निवेश संबंधी उद्देश्य से मेल खाती हो.
  • स्कीम्स के विकल्प :
    निवेशक अपने लिए उपलब्ध विभिन्न प्रकार की स्कीमों में से चयन कर सकते हैं ऊँचा जोखिम उठाने की क्षमता रखने वाले निवेशक ज्यादा आक्रामक स्कीमों को पसंद कर सकते हैं जब कि हर माह निश्चित राशि की आवश्यकतावाले निवेशक एमआईपी और अन्य उत्पाद अपना सकते हैं.
  • कर लाभ :
    इक्विटी फंडों, म्यूचुअल फंडों की इक्विटी स्कीमों से प्राप्त डिविडेंड (यानी 65%) से अधिक इक्विटी एक्सपोजर वाली स्कीमें) पूर्णत: कर मुक्त है. न तो म्यूचुअल फंड को डिविडेंड वितरण शुल्क अदा करना होता है न ही निवेशक को आयकर देना होता है.
  • सुनियोजित:
    भारत में म्यूच्युअल फंड्स सुनियोजित है, जहॉं सेबी म्यूचुअल फंडों की गतिविधियों पर निगाह रखती है
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Source : axisbank

म्यूचुअल फंड्स........एक नज़र

म्यूच्युअल फंड एक ट्रस्ट है जो अनेक निवेशकों की बचतों को जुटाता है जिनके आर्थिक लक्ष्य सामान्य होते हैं. इस तरह से जुटाए गए धन को पूँजी बाजार के लिखतों में निवेशित किया जाता है जैसे कि शेयर्स, डिबेंचर्स और अन्य प्रतिभूतियाँ इन निवेशों के जरिए अर्जित आय और प्राप्त पूँजी वर्धन इसके यूनिट धारकों द्वारा धारित यूनिटों की संख्या के अनुपात में साझा किया जाता है.
इस तरह से म्यूचुअल फंड आम आदमी के लिए सबसे उपयुक्त निवेश है क्योंकि ये वैविध्यीकृत, पेशेवर ढंग से प्रबंधित प्रतिभूतियों के समूह में तुलनात्मक रूप से कम लागत पर निवेश के लिए अवसर प्रदान करता है.
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Source : axisbank