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Saturday, April 14, 2012

करंट अकाउंट डेफिसिट :


जब किसी देश का निर्यात कम हो जाता है और आयात ज्यादा हो जाता है तो इस स्थिति में करंट अकाउंट डेफिसिट की स्थिति बन जाती है। इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है और कई बार जब डेफिसिट बहुत ज्यादा हो जाता है तो मुद्रा भंडार में विदेशी मुद्रा की कमी भी हो जाती है। जहां तक विकासशील देशों की बात है तो उनके साथ यह समस्या अक्सर आ जाती है। विकासशील देश अपने घरेलू उत्पादन को बढ़ाकर इस समस्या से निपट सकते हैं।

Wednesday, March 7, 2012

राइट्स इश्यू :

कई कंपनियां बाजार से और पैसा उगाहने के लिए राइट्स इश्यू लाती है यह भी एक प्रकार का एफपीओ होता है इसमें केवल उन्ही लोगों को शेयर दिए जाते हैं जिनके पास कंपनी के पहले से शेयर्स होते हैं। नए ग्राहकों को यह शेयर नहीं मिलते हैं।
राइट्स इश्यू के लिए कंपनी तय करती है कि उसका कौनसा ग्राहक कितने शेयर खरीद सकता है। इसमें शेयर खरीद की संख्या सीमित होती है। उस सीमित संख्या से ज्यादा शेयर नहीं खरीदे जा सकते।

कांट्रेक्ट नोट :


किसी मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में शेयरों और दूसरी सूचीबद्ध प्रतिभूतियों में कारोबार करने वाले निवेशकों के लिए कांट्रेक्ट नोट एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। एक ब्रोकर के जरिये एक निवेशक स्टॉक एक्सचेंज में जो भी लेनदेन करता है, कांट्रेक्ट नोट उसका वैध रिकार्ड माना जाता है। कांट्रेक्ट नोट से कई मकसद सधते हैं। इसमें न सिर्फ ट्रांजेक्शन का रिकार्ड होता है बल्कि यह लिखित तौर पर होता है।

बुक वैल्यू


किसी भी संपत्ति की बैलेंस शीट पर जो कीमत दिखाई जाती है, उसे बुक वैल्यू कहते हैं। इसकी गणना करने के लिए संपत्ति की लागत में से एक्यूमुलेटेड डेप्रीशिएशन को घटा देते हैं। किसी कंपनी के नेट असैट वैल्यू में कंपनी की प्रतिष्ठा (पेटेंट और उसकी प्रतिष्ठा) को संपत्ति के कुल लागत में घटा देने के बाद जो हासिल होता है उसे बुक वैल्यू कहते हैं।

स्वास्थ्य बीमा पोर्टेबिलिटी :


मोबाइल पोर्टेबिलिटी की तरह ही स्वास्थ्य बीमा पोर्टेबिलिटी भी लागू कर दिया गया है। वीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण यानि आईआरडीए ने 1 जुलाई से स्वास्थ्य बीमा पोर्टेबिलिटी लागू कर दी है। इसके तहत कोई भी मौजूदा पॉलिसीधारक वेटिंग अवधि के बिना पुरानी बीमा कंपनी को छोड़कर दूसरी बीमा कंपनी की सेवा ले सकता है।

आम बजट :

बजट सरकार के सालाना खर्च का ब्यौरा होता है। इसके जरिये सरकार की प्राप्तियों और खर्च का इंतजाम होता है। वित्त मंत्री सरकार के आय-व्यय का लेखा जोखा फरवरी महीने के आखिरी कार्य दिवस पर संसद में पेश करते हैं। इसमें टैक्स तथा अन्य़ तरह के प्रावधान होते हैं जिस पर संसद में चर्चा होती है। संसद की अनुमति के बाद एक निश्चित समय सीमा में बजट प्रस्ताव कानून में बदल जाते हैं। चुनाव के दौरान अंतरिम बजट पेश किया जाता है।

Monday, March 28, 2011

सेंसेक्स और निफ्टी

शेयर बाजारों की जब चर्चा होती है तो सेंसेक्स और निफ्टी का नाम आता है। अक्सर सुना जाता है कि सेंसेक्स बढ़ गया और निफ्टी गिर गया है। आइए हम बताते हैं इन दोनों का फर्क।

सेंसेक्स बंबई शेयर बाजार का इंडेक्स या सूचकांक है जबकि निफ्टी नैशनल स्टॉक एक्सचेंज का। बीएसई 30 बड़े और ऐक्टिव शेयरों का आधार है यानी इसकी चाल ये 30 शेयर ही तय करेंगे चाहे बाजार के ज्यादातर शेयर गिर भी जाएं तो भी अगर ये 30 चढ़ते रहेंगे तो सूचकांक बढ़ेगा। इस तीसों के अलग-अलग वजन हैं और इन पर सूचकांक निर्भर करेगा। ये अलग-अलग सेक्टरों के प्रतिनिधि होते हैं।

यही हाल निफ्टी का भी है। नैशनल स्टॉक एक्सचेंज के 50 बड़े शेयरों से यह बना है। ये भी अलग-अलग 24 सेक्टरों का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह कई उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जैसे बेंचमार्किंग फंड पोर्टफोलियो, इंडेक्स आधारित डेरिवेटिव्स और इंडेक्स फंड।

फिर भी दोनों का एक ही मकसद है शेयर बाजार की स्थिति बताना।
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Source : dainikbhaskar

राइट्स इश्यू :

कई कंपनियां बाजार से और पैसा उगाहने के लिए राइट्स इश्यू लाती है यह भी एक प्रकार का एफपीओ होता है इसमें केवल उन्ही लोगों को शेयर दिए जाते हैं जिनके पास कंपनी के पहले से शेयर्स होते हैं। नए ग्राहकों को यह शेयर नहीं मिलते हैं।

राइट्स इश्यू के लिए कंपनी तय करती है कि उसका कौनसा ग्राहक कितने शेयर खरीद सकता है। इसमें शेयर खरीद की संख्या सीमित होती है। उस सीमित संख्या से ज्यादा शेयर नहीं खरीदे जा सकते।
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Source : dainikbhaskar