आम बजट 2011-12 में वित्तमंत्री ने इन्फ्रास्ट्रक्चर बांड में निवेश पर टैक्स छूट का लाभ वित्तीय वर्ष 2011-12 में भी जारी रखने का ऐलान किया था। उल्लेखनीय है कि आम बजट 2010-11 में वित्तमंत्री ने वित्तीय वर्ष 2010-11 में व्यक्तिगत एवं एचयूएफ करदाताओं को आयकर अधिनियम की धारा 80 सीसीएफ के तहत इन्फ्रास्ट्रक्चर बांड में निवेश पर अधिकतम 20 हजार रुपए की अतिरिक्त छूट देने का प्रावधान किया था। यह छूट आयकर अधिनियम की धारा 80 सी, सीसीसी एवं सीसीडी के तहत प्राप्त हो रही एक लाख रुपए की छूट के अतिरिक्त है।
अब आप वित्तीय वर्ष 2011-12 में भी इन्फ्रास्ट्रक्चर बांड में निवेश पर अधिकतम 20 हजार रुपए की आय से अतिरिक्त छूट प्राप्त कर टैक्स बचत कर सकते हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर टैक्स सेविंग बांड के फीचर्स निम्न प्रकार हैं :-
निवेश की पात्रता- व्यक्तिगत (वयस्क) एवं एचयूएफ करदाता इन बांड में निवेश कर सकते हैं। एनआरआई करदाता को इन बांड में निवेश की पात्रता नहीं है।
निवेश की राशि- वैसे तो इन बांड्स में निवेश की अधिकतम कोई सीमा निर्धारित नहीं है। परंतु आयकर अधिनियम की धारा 80 सीसीएफ के तहत अधिकतम 20 हजार रुपए तक की ही छूट प्राप्त की जा सकती है।
निवेश की अवधि- सामान्यतः इन बांड में निवेश की अवधि 10 वर्ष होती है।
निवेश के विकल्प- इन बांड में निवेश के विभिन्न विकल्प होते हैं जिसके तहत सालाना ब्याज अथवा मैच्युरिटी पर एकसाथ ब्याज प्राप्त किया जा सकता है।
निवेश पर ब्याज- वर्तमान वित्तीय वर्ष में इन बॉण्ड में ब्याज दर 8% से 9% प्रतिवर्ष रहने का अनुमान है।
टीडीएस कटौती- इन बांड में टीडीएस कटौती नहीं की जाती है।
लॉक-इन पीरियड- इन बांड में लॉक-इन पीरियड पाँच वर्ष का होता है।
प्रीमैच्युर विड्रॉल- इन बांड में पांच वर्ष के बाद ही प्री-मैच्युर विड्रॉल किया जा सकता है। यह बांड नेशनल स्टॉक एक्सचेंज एवं बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होते हैं एवं पांच वर्ष बाद निवेशक इसे स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से विक्रय कर सकते हैं। साथ ही, इन बांड में पांच वर्ष बाद बायबैक ऑप्शन भी होता है जिसके तहत निवेशक पांच वर्ष बाद सीधे कंपनी से भी भुगतान प्राप्त कर सकते हैं।
लोन सुविधा- इन बांड में पांच वर्ष की अवधि तक कोई लोन सुविधा उपलब्ध नहीं होती है।
टैक्स- आयकर अधिनियम की धारा 80 सीसीएफ के तहत इन बांड में निवेश पर आय से 20 हजार रुपए तक की छूट प्राप्त की जा सकती है। इन बांड से प्राप्त ब्याज आय में शामिल किया जाता है, जिस पर करदाता को अपनी टैक्स स्लैब अनुसार टैक्स अदा करना होता है।
कैसे कर सकते हैं निवेश- विभिन्न इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनियां समय-समय पर प्रारंभिक निर्गम (इश्यू) के जरिए यह बांड जारी करती हैं। आप इन इश्यू के तहत इन्फ्रास्ट्रक्चर बांड में निवेश कर सकते हैं।
पोस्ट टैक्स यील्ड-
टैक्स स्लैब 10%, पोस्ट टैक्स यील्ड 10%
टैक्स स्लैब 20%, पोस्ट टैक्स यील्ड 11.8%
टैक्स स्लैब 30%, पोस्ट टैक्स यील्ड 14%
पोस्ट टैक्स यील्ड की गणना वर्तमान वर्ष में प्राप्त होने वाली टैक्स बचत एवं आगामी 5 वर्षों में 8.5% प्रतिवर्ष की दर से प्राप्त ब्याज पर टैक्स की गणना का समायोजन करके की गई है।
प्रस्तावित डायरेक्ट टैक्स कोड (डीटीसी) - प्रस्तावित डायरेक्ट टैक्स कोड के प्रावधानों के तहत यह छूट प्राप्त नहीं की जा सकेगी।
~
स्रोत : Moneycontrol.com
अब आप वित्तीय वर्ष 2011-12 में भी इन्फ्रास्ट्रक्चर बांड में निवेश पर अधिकतम 20 हजार रुपए की आय से अतिरिक्त छूट प्राप्त कर टैक्स बचत कर सकते हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर टैक्स सेविंग बांड के फीचर्स निम्न प्रकार हैं :-
निवेश की पात्रता- व्यक्तिगत (वयस्क) एवं एचयूएफ करदाता इन बांड में निवेश कर सकते हैं। एनआरआई करदाता को इन बांड में निवेश की पात्रता नहीं है।
निवेश की राशि- वैसे तो इन बांड्स में निवेश की अधिकतम कोई सीमा निर्धारित नहीं है। परंतु आयकर अधिनियम की धारा 80 सीसीएफ के तहत अधिकतम 20 हजार रुपए तक की ही छूट प्राप्त की जा सकती है।
निवेश की अवधि- सामान्यतः इन बांड में निवेश की अवधि 10 वर्ष होती है।
निवेश के विकल्प- इन बांड में निवेश के विभिन्न विकल्प होते हैं जिसके तहत सालाना ब्याज अथवा मैच्युरिटी पर एकसाथ ब्याज प्राप्त किया जा सकता है।
निवेश पर ब्याज- वर्तमान वित्तीय वर्ष में इन बॉण्ड में ब्याज दर 8% से 9% प्रतिवर्ष रहने का अनुमान है।
टीडीएस कटौती- इन बांड में टीडीएस कटौती नहीं की जाती है।
लॉक-इन पीरियड- इन बांड में लॉक-इन पीरियड पाँच वर्ष का होता है।
प्रीमैच्युर विड्रॉल- इन बांड में पांच वर्ष के बाद ही प्री-मैच्युर विड्रॉल किया जा सकता है। यह बांड नेशनल स्टॉक एक्सचेंज एवं बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होते हैं एवं पांच वर्ष बाद निवेशक इसे स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से विक्रय कर सकते हैं। साथ ही, इन बांड में पांच वर्ष बाद बायबैक ऑप्शन भी होता है जिसके तहत निवेशक पांच वर्ष बाद सीधे कंपनी से भी भुगतान प्राप्त कर सकते हैं।
लोन सुविधा- इन बांड में पांच वर्ष की अवधि तक कोई लोन सुविधा उपलब्ध नहीं होती है।
टैक्स- आयकर अधिनियम की धारा 80 सीसीएफ के तहत इन बांड में निवेश पर आय से 20 हजार रुपए तक की छूट प्राप्त की जा सकती है। इन बांड से प्राप्त ब्याज आय में शामिल किया जाता है, जिस पर करदाता को अपनी टैक्स स्लैब अनुसार टैक्स अदा करना होता है।
कैसे कर सकते हैं निवेश- विभिन्न इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनियां समय-समय पर प्रारंभिक निर्गम (इश्यू) के जरिए यह बांड जारी करती हैं। आप इन इश्यू के तहत इन्फ्रास्ट्रक्चर बांड में निवेश कर सकते हैं।
पोस्ट टैक्स यील्ड-
टैक्स स्लैब 10%, पोस्ट टैक्स यील्ड 10%
टैक्स स्लैब 20%, पोस्ट टैक्स यील्ड 11.8%
टैक्स स्लैब 30%, पोस्ट टैक्स यील्ड 14%
पोस्ट टैक्स यील्ड की गणना वर्तमान वर्ष में प्राप्त होने वाली टैक्स बचत एवं आगामी 5 वर्षों में 8.5% प्रतिवर्ष की दर से प्राप्त ब्याज पर टैक्स की गणना का समायोजन करके की गई है।
प्रस्तावित डायरेक्ट टैक्स कोड (डीटीसी) - प्रस्तावित डायरेक्ट टैक्स कोड के प्रावधानों के तहत यह छूट प्राप्त नहीं की जा सकेगी।
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स्रोत : Moneycontrol.com